द देवरिया न्यूज़,कुशीनगर। लोक आस्था के महापर्व छठ पर जहां लाखों हिंदू महिलाएं भगवान भास्कर और छठ माता की पूजा करती हैं, वहीं कुशीनगर जिले के कसया विकास खंड के भैंसहा गांव की रहने वाली आसमा खातून अपने अटूट विश्वास और भक्ति से सामाजिक सद्भाव की मिसाल बन गई हैं। आसमा हर वर्ष पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निर्जला व्रत रखकर छठ माता की पूजा करती हैं।
सात वर्ष पूर्व शुरू हुआ आस्था का यह सफर
आसमा खातून बताती हैं कि करीब सात साल पहले उनके छोटे बेटे अमजद की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई थी। इलाज के लिए वह गोरखपुर पहुंचीं, लेकिन दुर्भाग्यवश अस्पताल बंद मिला। निराश होकर जब वह लौट रही थीं, तभी उन्होंने रास्ते में कई महिलाओं को छठ पूजा की तैयारी करते देखा। उनकी भक्ति और समर्पण देखकर आसमा के मन में भी श्रद्धा जागी और उन्होंने मन ही मन छठ माता से अपने बेटे के स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने संकल्प लिया कि अगर उनका बेटा ठीक हो गया, तो वह हर वर्ष छठ का व्रत रखकर माता की पूजा करेंगी।
मां छठ की कृपा से मिला वरदान
आसमा कहती हैं कि छठ माता की असीम कृपा से उनका बेटा धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ हो गया। तभी से उन्होंने आजीवन इस व्रत को निभाने का संकल्प लिया। आसमा बताती हैं कि यह पर्व उनके लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कृतज्ञता, श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है।
सामाजिक सौहार्द की प्रेरणा
आसमा खातून का यह समर्पण गांव और क्षेत्र में सांप्रदायिक एकता और भाईचारे की मिसाल बन गया है। उनके घर के आंगन में हर साल छठ पूजा के गीत गूंजते हैं और सभी समुदाय के लोग इसमें शामिल होते हैं। आसमा कहती हैं, “छठ माता सबकी हैं — जो सच्चे मन से व्रत रखता है, मां उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं।”
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