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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान बना मध्यस्थ, कूटनीतिक कोशिशें तेज

Published on: March 29, 2026
Amid US-Iran tension
द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बीते चार दिनों में तुर्की के विदेश मंत्री से चार बार फोन पर बातचीत की है, जो क्षेत्रीय हालात की गंभीरता को दर्शाता है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इन देशों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है और तेजी से बदलते हालात पर नजर रखी जा रही है। बातचीत में खास तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बैक-चैनल कूटनीति पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव फैल गया है। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य को भी निशाना बनाया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान युद्धविराम के लिए तैयार है और बातचीत करना चाहता है, हालांकि तेहरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह किसी दबाव में नहीं है और अमेरिका के आरोप बेबुनियाद हैं।
इस बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के साथ अपने रिश्तों का हवाला देते हुए बातचीत की मेजबानी की पेशकश की है। इस्लामाबाद का मानना है कि वह इस संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में उसकी मध्यस्थता कितनी प्रभावी होगी, यह देखना बाकी है।
दूसरी ओर, तुर्की भी इस मामले में सक्रिय नजर आ रहा है। अंकारा ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास और तेज होने की संभावना है।

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