अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार कई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील करने के दावे करती रही है। अब सवाल यह है कि कितने ऐसे देश बचे हैं, जिनसे अब तक कोई डील नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से पहले और बाद में जिस तरह अमेरिका के साथ समझौते की बातें सामने आई हैं, उससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।
रुपये की गिरती कीमत पर चिंता
सपा अध्यक्ष ने रुपये की कमजोर होती स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि अमेरिका के साथ इस ट्रेड डील के बाद रुपये की हालत क्या होगी। अगर यही डील करनी थी तो पहले क्यों नहीं की गई—इस पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब देश को यह समझना होगा कि 18 बड़ा है या 0 और बजट पहले बना या डील पहले हो गई।
बजट 2026 को बताया दिशाहीन
अखिलेश यादव ने बजट 2026 को दिशाहीन करार देते हुए कहा कि इसमें गरीब, पिछड़े और दलित वर्ग के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े बजट के बावजूद प्रति व्यक्ति आय क्यों नहीं बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने फ्री राशन पाने वाले लोगों की प्रति व्यक्ति आय सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि बजट में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए किसी विशेष योजना का उल्लेख नहीं है। प्रधानमंत्री यूपी से होने के बावजूद केंद्र सरकार के बजट से एक भी नया एक्सप्रेसवे नहीं बना। जो एक्सप्रेसवे बने भी हैं, वे ‘विकसित भारत’ के मानकों पर खरे नहीं उतरते। भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बनने वाले एक्सप्रेसवे का नाम बदले जाने की घटना को सिर्फ कागजी कार्रवाई बताया।
किसानों की आय और MSP पर सवाल
अखिलेश यादव ने किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी दावों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अमेरिका से हुई ट्रेड डील के बाद किसानों का भविष्य और ज्यादा अनिश्चित हो जाएगा। जब विदेशी आयात बढ़ेगा तो किसान क्या उगाएगा और क्या बेचेगा।
उन्होंने कहा कि एग्री इंफ्रा और मंडियों की बात तो की जाती है, लेकिन किसानों को आज तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी नहीं मिली। उन्होंने बागवानी फसलों और दुग्ध उत्पादन के आंकड़े गिनाने पर भी सरकार को घेरा और पूछा कि MSP की गारंटी आखिर कब दी जाएगी।
महंगाई, सोना-चांदी और ‘विकसित भारत’ पर तंज
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों पर भी अखिलेश यादव ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महंगाई इस कदर बढ़ रही है कि बेटियों की शादी में गहने देना भी मुश्किल होता जा रहा है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि लोहे पर पीतल चढ़ाकर भी बेटी की विदाई संभव नहीं हो पाएगी।
2047 के ‘विकसित भारत’ विजन को खोखला बताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस बजट में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसा लगता है कि सरकार ने इन वर्गों के बारे में सोचना ही छोड़ दिया है।
आरक्षण, बुलेट ट्रेन और बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा
अखिलेश यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में जिस तरह नियुक्तियां हो रही हैं, उससे आरक्षण के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक भारत को विकसित देश नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने बुलेट ट्रेन को केवल संपन्न राज्यों तक सीमित रखने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यूपी, बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में बुलेट ट्रेन क्यों नहीं चलाई जा सकती। वाराणसी के दालमंडी इलाके में बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने वोट नहीं दिया, उनके घर तोड़े जा रहे हैं।