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हरियाणा में एडीजीपी वाई पूरण कुमार आत्महत्या मामला: राहुल गांधी आज करेंगे अमनीत पी कुमार से मुलाकात, सियासी पारा चढ़ा

Published on: October 14, 2025
ADGP Y Puran Kumar in Haryana
द देवरिया न्यूज़ , हरियाणा :हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एडीजीपी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। घटना के सातवें दिन प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी चंडीगढ़ पहुंचेंगे। वह दिवंगत अधिकारी की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त करेंगे।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राहुल गांधी के इस दौरे की जानकारी साझा की है। इसके बाद हरियाणा सरकार में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, 17 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हरियाणा दौरा रद्द कर दिया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। साथ ही, सोनीपत में होने वाली भाजपा की रैली को भी स्थगित करने की जानकारी सामने आई है।

सरकार में मचा हड़कंप, मुख्यमंत्री ने भी बदला कार्यक्रम

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सोमवार शाम को अचानक अपना दिल्ली दौरा रद्द कर दिया। वे पहले सोनीपत में प्रधानमंत्री की प्रस्तावित रैली स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन बाद में चंडीगढ़ लौट आए। इस घटनाक्रम के बीच, प्रदेश भर में प्रशासनिक हलचल देखी जा रही है।
मामले को लेकर कुरुक्षेत्र, अंबाला और पानीपत के राजस्व अधिकारियों ने मंगलवार को एक दिन का सामूहिक अवकाश लेने की घोषणा की है। वहीं, सीएम सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम घोष के बीच सोमवार को हुई मुलाकात ने भी राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।

राहुल गांधी की चंडीगढ़ यात्रा

कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी मंगलवार शाम 5:15 बजे चंडीगढ़ के सेक्टर-24 स्थित सरकारी आवास पर आईएएस अमनीत पी कुमार से मुलाकात करेंगे और एडीजीपी वाई पूरण कुमार को श्रद्धांजलि देंगे। इस दौरान राहुल गांधी उनके परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त करेंगे और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।

सातवें दिन भी सरकार की ‘मान-मन्नौवल’ जारी

दिवंगत एडीजीपी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले में हरियाणा सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से लगातार सातवें दिन भी अमनीत पी कुमार को मनाने की कोशिशें जारी रहीं। हालांकि अब यह जिम्मेदारी मंत्रियों से हटकर सीएम ऑफिस के अफसरों और मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों पर आ गई है।
सोमवार को मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव सुदेश कटारिया, राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरजीत कौर बारी-बारी से अमनीत पी कुमार से मिलने पहुंचे, लेकिन पूरे दिन चली बातचीत के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से अमनीत पी कुमार को शव का पोस्टमार्टम कराने और डीजीपी शत्रुजीत के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है। लेकिन अमनीत अब भी अपने रुख पर कायम हैं और जब तक न्याय की गारंटी नहीं मिलती, वह आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं।

नेताओं का तांता, लेकिन नहीं हुआ समाधान

रविवार की रात से सोमवार दोपहर तक कई राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियां अमनीत पी कुमार के आवास पर पहुंचीं।
  • रविवार देर रात सुदेश कटारिया ने उनसे मुलाकात की।
  • सोमवार सुबह 9:40 बजे कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष उदयभान चौधरी और पूर्व सांसद सतपाल ब्रह्मचारी वहां पहुंचे।
  • इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने भी मुलाकात की।
  • दोपहर में उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और बाद में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के साथ तरुण भंडारी पहुंचे।
  • पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और अंबाला की विधायक प्रत्याशी चित्रा सरवारा ने भी सांत्वना दी।
लगातार मुलाकातों और चर्चाओं के बावजूद पीजीआई की मोर्चरी में रखे एडीजीपी पूरण कुमार के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। परिवार का कहना है कि वे तभी आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार होंगे, जब सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का लिखित आश्वासन दे।

राजनीतिक हलचल और बढ़ती संवेदनशीलता

इस संवेदनशील प्रकरण ने हरियाणा की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक ओर कांग्रेस इस मुद्दे को पुलिस-प्रशासनिक उत्पीड़न से जोड़कर उठा रही है, वहीं सरकार नुकसान नियंत्रण में जुटी है। राहुल गांधी का चंडीगढ़ दौरा इस विवाद को और राजनीतिक रंग देने वाला माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या अमनीत पी कुमार सरकार के अनुरोध पर पोस्टमार्टम की अनुमति देती हैं या मामला और गहराई में उलझता है। उधर, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल इस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा में जुटे हैं।
यह मामला अब केवल एक अधिकारी की आत्महत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक दबाव, राजनीतिक जिम्मेदारी और सरकारी संवेदनशीलता की कसौटी बन गया है।

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