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यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत आएंगे पुतिन; लाखों भारतीय मजदूरों से जुड़ी बड़ी डील होने की संभावना

Published on: December 2, 2025
Ukraine for the first time since the war

द देवरिया न्यूज़,मास्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आ रहे हैं। यूक्रेन पर हमले के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। इससे पहले पुतिन दिसंबर 2021 में दिल्ली आए थे। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच मजदूरों के सहयोग को लेकर एक बड़ी समझौता होने की संभावना है।

रूस इस समय भारी श्रमिक संकट से गुजर रहा है। उसकी योजना 10 लाख विदेशी मजदूरों की भर्ती करने की है, जिसमें भारत भी महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। रूस के लेबर मंत्रालय का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश में श्रमिकों की कमी बढ़कर 31 लाख तक पहुंच जाएगी।


श्रमिकों की कमी क्यों बढ़ी रूस में?

विश्लेषकों के अनुसार:

  • यूक्रेन युद्ध में रूस के हजारों युवाओं की मौत हो चुकी है।

  • देश की जनसंख्या लगातार घट रही है और जन्मदर कम हो रही है।

  • पुनर्निर्माण और औद्योगिक कामों के लिए बड़ी संख्या में श्रमिकों की जरूरत है।

इस स्थिति से निपटने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने देश में बच्चों के जन्म पर आर्थिक लाभ बढ़ाने की घोषणा भी की है।


मध्य एशिया के मजदूरों पर निर्भरता कम करना चाहता है रूस

अब तक रूस में लाखों मजदूर मध्य एशियाई देशों से आते रहे हैं। लेकिन:

  • मॉस्को को इनमें कट्टरपंथ और सुरक्षा खतरे की आशंका रही है।

  • मार्च 2024 में मॉस्को में हुए आतंकी हमले के बाद यह चिंता और बढ़ गई।

  • रूस की नई माइग्रेशन नीति में ऐसे मजदूरों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो रूसी समाज के पारंपरिक आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों के अनुरूप हों।

इस कारण रूस अब 7 लाख से अधिक मध्य एशियाई मजदूरों की जगह नए देशों, विशेषकर भारत, से श्रमिक लाने पर विचार कर रहा है।


पुतिन की भारत यात्रा में क्या हो सकती है डील?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • भारत और रूस के बीच ब्लू-कॉलर वर्कर्स पर बड़ी साझेदारी हो सकती है।

  • भारतीय मजदूरों को निर्माण, उद्योग और सर्विस सेक्टर में काम करने का अवसर मिल सकता है।

  • उन्हें रूस में नागरिकता या स्थायी निवास नहीं मिलेगा; काम पूरा होने पर उन्हें वापस लौटना होगा।

  • भारतीय मजदूरों को मध्य एशियाई श्रमिकों की तुलना में अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित माना जा रहा है।

भारत में रूस के प्रति सकारात्मक छवि और भारतीय समाज की सेकुलर सोच भी इस सहयोग को बढ़ावा दे रही है।


भारत को क्या फायदा होगा?

कनाडा स्थित विश्लेषक रितेश जैन के अनुसार:

  • आने वाले 3–5 वर्षों में भारत का सबसे बड़ा निर्यात अकुशल और अर्द्धकुशल श्रमिक बन सकता है।

  • इससे भारत की विदेशी कमाई (remittances) में बड़ा इजाफा होगा।

  • भारतीय युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।


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