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यूपी में प्रदूषण नियंत्रण की एनओसी अब महंगी: उद्योगों और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए 2 से 2.6 गुना बढ़े शुल्क

Published on: December 4, 2025
Pollution control in UP

द देवरिया न्यूज़,उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में उद्योगों, स्थानीय निकायों और आवासीय परियोजनाओं को अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी (सहमति पत्र) लेने के लिए पहले से 2 से 2.6 गुना तक अधिक शुल्क देना होगा। राज्य सरकार की कैबिनेट ने उप्र जल (मल एवं व्यावसायिक बहिस्राव निस्तारण के लिए सहमति) तृतीय संशोधन नियमावली-2025 और उप्र वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) चतुर्थ संशोधन नियमावली-2025 को मंजूरी दे दी है।
इन नियमों के तहत हर दो साल में शुल्क को 10% तक बढ़ाया जा सकेगा।


क्यों बढ़ाए गए शुल्क?

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि उद्योगों और निकायों में एसटीपी व अन्य शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना और संचालन के लिए सहमति शुल्क में संशोधन जरूरी हो गया था।
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आय का मुख्य स्रोत यही जल एवं वायु सहमति शुल्क है।

साल 2008 के बाद से शुल्कों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी जबकि इस अवधि में मुद्रास्फीति (मूल्य सूचकांक) 2.65 गुना बढ़ चुकी है।
बोर्ड के मुताबिक—

  • कामकाज में वृद्धि,

  • न्यायालयों के आदेशों का पालन,

  • और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों के चलते
    शुल्क वृद्धि आवश्यक थी।


केंद्रीय निर्देशों के आधार पर शुल्क निर्धारण

केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा नए निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार राज्य सरकार ने शुल्क दरें तय की हैं।

  • 7 श्रेणियों में शुल्क विभाजित किया गया है।

  • हरी, नारंगी और लाल—तीन प्रदूषण श्रेणियों के आधार पर दरें निर्धारित की गई हैं।

  • जल एवं वायु अधिनियम के तहत शुल्क अलग-अलग तय है।


डीजल जेनरेटर पर शुल्क

  • 250 केवीए तक के डीजल जेनरेटर पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।

  • 250 केवीए से अधिक क्षमता होने पर 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक का वार्षिक शुल्क लगेगा।


स्थानीय निकाय व आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए नई दरें

अब अपार्टमेंट, वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, शैक्षणिक संस्थान, टाउनशिप, जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड समेत सभी अवसंरचना परियोजनाओं के शुल्क नई दरों पर तय होंगे।

  • उत्सर्जित और उपचारित मल के आधार पर 5,000 से 6 लाख रुपये तक वार्षिक शुल्क देना होगा।

  • सहमति का संचालन शुल्क डेढ़ गुना होगा।


उद्योगों के लिए नई शुल्क दरें (हरे–नारंगी–लाल श्रेणी अनुसार)

पूंजी निवेश के आधार पर शुल्क (रुपये में):

  • 1000 करोड़ से अधिक :

    • हरी: 5,00,000

    • नारंगी: 5,75,000

    • लाल: 6,50,000

  • 500–1000 करोड़ :

    • हरी: 1,50,000

    • नारंगी: 1,72,000

    • लाल: 1,95,000

  • 100–500 करोड़ :

    • हरी: 1,00,000

    • नारंगी: 1,15,000

    • लाल: 1,30,000

  • 50–100 करोड़ :

    • हरी: 75,000

    • नारंगी: 86,000

    • लाल: 94,000

  • 10–50 करोड़ :

    • हरी: 50,000

    • नारंगी: 58,000

    • लाल: 65,000

  • 1–10 करोड़ :

    • हरी: 20,000

    • नारंगी: 23,000

    • लाल: 26,000

  • 1 करोड़ तक :

    • हरी: 5,000

    • नारंगी: 7,500

    • लाल: 10,000


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