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पंचायत चुनाव: फर्जी वोटरों का पर्दाफाश — निर्वाचन आयोग लाया रियल-टाइम फोटो-सिंक मोबाइल एप

Published on: November 2, 2025
Panchayat elections fake voters
द देवरिया न्यूज़,लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (अप्रैल-मई) की तैयारी के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने फर्जी/डुप्लीकेट मतदाताओं पर कड़ा प्रहार करने के लिए एक मोबाइल एप विकसित कराने का निर्णय लिया है। इस एप से मतदान के समय बूथ पर आने वाले प्रत्येक मतदाता की फोटो ली जाएगी और रीयल-टाइम में आयोग के सर्वर पर सिंक कर दी जाएगी — ताकि कोई भी व्यक्ति एक ही या अलग चरणों में दोबारा वोट न डाल सके।
आयोग ने बताया है कि 2021 के पंचायत चुनावों की मतदाता सूची में 12.45 करोड़ मतदाता थे। सूची के प्रारूप-विश्लेषण में लगभग 90 लाख ऐसे नाम मिले जिनके नाम, पिता का नाम और लिंग समान हैं, जबकि 2.27 करोड़ मतदाताओं को डुप्लीकेट होने की आशंका बताई जा रही है। चुनाव दिवस पर इस एप का इस्तेमाल पीठासीन अधिकारी करेंगे, जो मोबाइल नंबर पर प्राप्त वन-टाइम पासवर्ड (OTP) से लॉग-इन करेंगे। मतदान के समय ली गई फोटो के साथ आयोग की ओर से मिले विशिष्ट मतदाता नंबर को भी रिकॉर्ड कर लिया जाएगा। यदि किसी ने दूसरी बार वोट देकर कोशिश की तो सिस्टम अलर्ट उत्पन्न करेगा और यह बताएगा कि वही मतदाता कब और किस बूथ पर पहले वोट दे चुका है।
आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पंचायत चुनाव में औसतन 70–80 प्रतिशत मतदान होता है, अतः इसी अनुपात में फोटो डेटाबेस बन जाएगा, जिसका बाद में उपयोग फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र (photo-EPIC) बनाने में भी किया जा सकेगा। इस तकनीक का पायलट प्रयोग मध्य प्रदेश में पहले भी हुआ है और वहां के अनुभव के आधार पर इसे यूपी में अपनाया जा रहा है।
लागू करने के फायदे
  • रीयल-टाइम डुप्लीकेट वोटिंग पर रोक; चुनावी ईमानदारी बढ़ेगी।
  • पोस्ट-इलेक्शन जांच में सबूत उपलब्ध होंगे।
  • दीर्घकालिक रूप से फोटो-आधारित मतदाता पहचान पत्र की तैयारी में मदद मिलेगी।
गोपनीयता और चुनौतियाँ
  • वोटर-फोटो और बायो-डेटा के संरक्षण के स्पष्ट नियम आवश्यक हैं।
  • सर्वर-सिक्योरिटी, नेटवर्क कवरेज और बूथ पर स्मार्टफोन की उपलब्धता बुनियादी चुनौतियाँ होंगी।
  • किसी तकनीकी विफलता या सिंक-डिले की स्थिति में मतदान सुचारु बनाये रखने के लिए बैक-अप प्रक्रियाएँ ज़रूरी हैं।
  • समय-समय पर आयटी ऑडिट और स्वतंत्र निगरानी से पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी।
आयोग ने कहा है कि एप उपयोग केवल मतदान-समय के लिए है और डेटा संरक्षण के लिए कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उपाय किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन अधिकारी जिलों को निर्देश दे रहे हैं कि वे डुप्लीकेट मतदाता सूचियों की साफ़-सफाई भी सुनिश्चित करें ताकि चुनाव प्रक्रिया और अधिक स्वच्छ बन सके।

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