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तर्कहीन चुनावी रेवड़ियों’ पर सुप्रीम कोर्ट मार्च में करेगा सुनवाई, PIL पर सुनवाई को मंजूरी

Published on: February 6, 2026
On 'irrational election mobs'

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों से पहले राजनीतिक दलों द्वारा ‘तर्कहीन चुनावी रेवड़ियों’ (irrational freebies) के वादों के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर मार्च में सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। याचिका में ऐसी घोषणाएं करने वाली पार्टियों का पंजीकरण रद्द करने या चुनाव चिह्न जब्त करने की मांग की गई है। गुरुवार को यह मामला मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष उठाया गया। पीठ ने संकेत दिया कि इस अहम मुद्दे पर मार्च में सुनवाई शुरू की जाएगी।


2022 में जारी हो चुका है नोटिस

याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने अदालत को बताया कि उनकी PIL पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को वर्ष 2022 में ही नोटिस जारी किया जा चुका है। उन्होंने आग्रह किया कि मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और मार्च में इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।


‘रेवड़ी बजट कई बार नियमित बजट से ज्यादा’

गौरतलब है कि 25 जनवरी 2022 को तत्कालीन CJI एन.वी. रमना की पीठ ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। तब अदालत ने टिप्पणी की थी कि कई मामलों में चुनावी रेवड़ियों का बजट नियमित बजट से भी अधिक हो जाता है


याचिका में क्या कहा गया है

PIL में कहा गया है कि जनता के खजाने से अतार्किक चुनावी वादे करना:

  • मतदाताओं को गलत तरीके से प्रभावित करता है

  • चुनावी मुकाबले में बराबरी का मैदान (level playing field) खत्म करता है

  • और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को नुकसान पहुंचाता है


कानून बनाने की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि वह चुनावी रेवड़ियों के खिलाफ स्पष्ट कानून बनाए। याचिका के अनुसार, इस तरह के वादों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करना:

  • लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है

  • संविधान की भावना के विपरीत है

  • और सरकारी खजाने के दम पर रिश्वत देने के समान है

याचिका में कहा गया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए इस प्रवृत्ति पर रोक जरूरी है।


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