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मायावती का मुस्लिम मतदाताओं पर फोकस: 2027 से पहले यूपी की सियासत में नया समीकरण बनने की तैयारी

Published on: October 31, 2025
Mayawati's Muslim voters

द देवरिया न्यूज़ ,लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती एक बार फिर मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही हैं। 29 अक्तूबर को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित दलित-मुस्लिम भाईचारा समिति की बैठक में मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मुस्लिम समाज के बीच जाकर यह विश्वास दिलाएं कि उनका भविष्य बसपा के शासन में ही सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता मुसलमानों को उन कामों की जानकारी दें जो उनकी सरकार ने अल्पसंख्यकों के हित में किए थे।

मायावती का यह कदम ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। भाजपा जहां विपक्ष पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगा रही है, वहीं सपा और कांग्रेस भाजपा पर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा करने का आरोप लगा रही हैं। इस बीच मायावती का मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।

2007 के चुनाव में बसपा ने दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम गठजोड़ के सहारे बहुमत हासिल किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर मुस्लिम मतदाता फिर से बसपा की ओर झुकते हैं तो इसका सीधा असर सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर पड़ेगा, जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम और दलित समर्थन से भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी।

मायावती का भरोसा और बसपा की रणनीति

बैठक में मायावती ने कहा कि उनकी सरकार में सभी वर्गों को सुरक्षा और सम्मान मिला था। उन्होंने आश्वासन दिया कि सत्ता में वापसी पर ‘बुलडोजर राजनीति’ को समाप्त किया जाएगा और कानून व्यवस्था को निष्पक्ष रूप से लागू किया जाएगा।

बसपा के लखनऊ मंडल प्रभारी फैजान खान ने कहा कि मायावती की सरकार प्रदेश के इतिहास में सबसे निष्पक्ष और विकासमुखी रही। उन्होंने बिना किसी पक्षपात के अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की थी और हर समाज को अवसर दिया था। उन्होंने भाजपा और सपा दोनों पर आरोप लगाया कि ये पार्टियां सत्ता में आने के बाद केवल सांप्रदायिक विभाजन को गहराने का काम करती हैं।

कांग्रेस का पलटवार

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने मायावती की पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में आज केवल कांग्रेस ही गरीबों, दलितों और मुसलमानों की असली आवाज बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि चाहे सीएए-एनआरसी का विरोध हो या अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने हमेशा सड़क पर उतरकर लोगों के साथ खड़े होने का काम किया है। उनका कहना था कि दलित और मुस्लिम समाज अब कांग्रेस के साथ स्थायी रूप से जुड़ चुका है क्योंकि उन्हें पता है कि वही पार्टी उनके हक के लिए संघर्ष करती है।

सपा का तीखा जवाब

वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद आजम खान ने कहा कि मुसलमान अब मायावती की “चुप्पी की राजनीति” को समझ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मायावती हर बार ऐसे वक्त पर बयान देती हैं जिससे भाजपा को राजनीतिक फायदा पहुंचता है। उन्होंने कहा कि जब-जब मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार हुए, मायावती ने कभी आवाज नहीं उठाई।

आजम खान ने कहा कि आज का मुसलमान शिक्षा, रोजगार और विकास की राजनीति चाहता है। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव की सरकार ने मुसलमानों को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए थे और 2027 के चुनाव में सपा दलितों और मुसलमानों दोनों का समर्थन लेकर भाजपा को कड़ी टक्कर देगी।


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