इस ऐतिहासिक मिशन के जरिए ऐसे अत्याधुनिक उपग्रह को अंतरिक्ष में तैनात किया जाएगा, जिसे पूरी दुनिया में सीधे स्मार्टफोन तक हाई-स्पीड सेल्युलर ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है। इस तकनीक से बिना किसी टावर या पारंपरिक नेटवर्क के, उपग्रह के माध्यम से मोबाइल कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी।
एएसटी स्पेसमोबाइल (AST एंड साइंस, एलएलसी) दुनिया की पहली और एकमात्र ऐसी कंपनी है, जो अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क विकसित कर रही है। यह नेटवर्क सीधे सामान्य स्मार्टफोन पर काम करेगा और इसे वाणिज्यिक व सरकारी दोनों तरह के उपयोग के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का लक्ष्य उन अरबों लोगों तक इंटरनेट पहुंचाना है, जो आज भी विश्वसनीय कनेक्टिविटी से वंचित हैं।
कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि वह करीब छह अरब मोबाइल उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली कनेक्टिविटी की समस्या को दूर करने के मिशन पर काम कर रही है। इसके तहत दूरदराज और नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों में भी निर्बाध इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
एएसटी स्पेसमोबाइल इससे पहले सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड-1 से ब्लूबर्ड-5 तक पांच उपग्रह लॉन्च कर चुकी है। इन उपग्रहों के जरिए अमेरिका और कुछ अन्य चुनिंदा देशों में निरंतर इंटरनेट कवरेज संभव हुआ है। अब कंपनी अपने नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए ऐसे ही और उपग्रह लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए एएसटी स्पेसमोबाइल ने दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है।
आगामी ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन वैश्विक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किए जाने वाले उपग्रहों के समूह का हिस्सा होगा। इसका उद्देश्य 24 घंटे, दुनिया के किसी भी हिस्से में सीधे मोबाइल फोन पर तेज़ और भरोसेमंद सेल्युलर ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराना है।
इसरो के अनुसार, यह प्रक्षेपण न केवल भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर उपग्रह आधारित मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी एक अहम कदम साबित होगा।