कांग्रेस का यह फैसला मोकिम द्वारा हाल ही में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे गए एक तीखे पत्र के बाद सामने आया है। पत्र में मोकिम ने पार्टी की मौजूदा स्थिति, संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक चुनौतियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने राहुल गांधी की कथित अनुपलब्धता, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की नेतृत्व शैली और पार्टी से युवाओं की बढ़ती दूरी पर सवाल उठाए थे।
पत्र में संगठन और नेतृत्व पर उठाए थे सवाल
बराबती-कटक विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके मोकिम ने अपने पत्र में लिखा था कि कांग्रेस अपनी विरासत बाहरी विरोधियों की वजह से नहीं, बल्कि आंतरिक फैसलों और कमजोर नेतृत्व के कारण खो रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से राहुल गांधी से मुलाकात नहीं कर सके हैं, जो केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है।
खरगे की उम्र और युवाओं से दूरी पर टिप्पणी
मोकिम ने पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उम्र को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने लिखा था कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी युवा है, लेकिन 83 वर्षीय नेतृत्व युवाओं से प्रभावी संवाद स्थापित करने में असफल हो रहा है, जिससे पार्टी युवा वर्ग से कटती जा रही है।
प्रियंका गांधी को बड़ी भूमिका देने की मांग
पत्र में मोकिम ने जहां राहुल गांधी और खरगे के नेतृत्व की आलोचना की थी, वहीं प्रियंका गांधी को पार्टी में अधिक सक्रिय और केंद्रीय भूमिका देने की वकालत भी की थी। उन्होंने लिखा था कि देश की युवा आबादी प्रियंका गांधी के नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रही है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया था कि भविष्य में कांग्रेस का नेतृत्व सचिन पायलट, डीके शिवकुमार और शशि थरूर जैसे ऊर्जावान नेताओं को सौंपा जाना चाहिए।
पार्टी नेतृत्व पर इस तरह की सार्वजनिक और आंतरिक आलोचना को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस ने मोहम्मद मोकिम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया है।