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सुगौली विधानसभा में बदला समीकरण: नामांकन रद्द होने से वीआईपी और राजद को बड़ा झटका, अब लोजपा-जन सुराज के बीच सीधा मुकाबला

Published on: October 22, 2025
Equation changed in Sugauli Assembly
द देवरिया न्यूज़ ,पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे में देरी कई दलों पर भारी पड़ती दिख रही है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होते-होते कुछ दलों के प्रत्याशी तकनीकी कारणों से मैदान से बाहर हो गए, जिससे कई सीटों का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। सबसे बड़ा झटका सुगौली विधानसभा सीट पर देखने को मिला है। यहां राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मौजूदा विधायक और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रत्याशी शशि भूषण सिंह का नामांकन प्रस्तावकों की कमी के कारण रद्द कर दिया गया।
✦ नामांकन के दौरान हुई बड़ी चूक
चुनाव आयोग के अनुसार, वीआईपी एक निबंधित लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं पार्टी है, ऐसे में इसके प्रत्याशी को नामांकन के समय कम से कम 10 प्रस्तावकों की आवश्यकता होती है। लेकिन शशि भूषण सिंह ने गलती से सिर्फ एक प्रस्तावक के साथ नामांकन दाखिल कर दिया। जांच के दौरान यह तकनीकी खामी सामने आई और निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।
✦ राजद के बागी ओमप्रकाश चौधरी भी बाहर
सुगौली सीट पर ही राजद के बागी ओमप्रकाश चौधरी ने निर्दलीय के रूप में नामांकन किया था, लेकिन उनका नामांकन भी अधूरा फॉर्म भरने के कारण खारिज कर दिया गया। चुनाव आयोग ने बताया कि चौधरी ने अपने नामांकन पत्र में कई महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़ दिए थे, जो नियमों के विपरीत है।
✦ अब मुकाबला लोजपा (रामविलास) बनाम जन सुराज
इन दोनों उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने के बाद अब सुगौली विधानसभा में मुकाबला एनडीए समर्थित लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रत्याशी राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अजय झा के बीच सिमट गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस घटनाक्रम से एनडीए खेमे को सीधा लाभ मिल सकता है, क्योंकि राजद और वीआईपी समर्थक वोटों का एक बड़ा हिस्सा अब बिखर सकता है।
✦ पिछला चुनाव रहा था कड़ा मुकाबला
पिछले विधानसभा चुनाव में राजद के शशि भूषण सिंह ने वीआईपी प्रत्याशी रामचंद्र सहनी को 3,447 वोटों से हराया था। उस समय शशि भूषण सिंह को 65,267 वोट, जबकि रामचंद्र सहनी को 61,820 वोट मिले थे।
✦ गठबंधन की देरी से नुकसान
इस बार सीट बंटवारे और प्रत्याशी चयन में देरी के कारण कई दलों को नामांकन में तकनीकी चूकें हो रही हैं। इससे न केवल संगठन की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ रहा है।मढ़ौरा में भी लोजपा (रामविलास) की प्रत्याशी सीमा सिंह को इसी तरह की स्थिति में बिना चुनाव लड़े ही बाहर होना पड़ा।अब जब मतदान की तारीख नजदीक है, तो सुगौली जैसी सीटों पर यह बदलाव पूरे चुनावी गणित को नया मोड़ दे सकता है।

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