द देवरिया न्यूज़ ,देवरिया। पवित्रता, आस्था और प्रकाश का प्रतीक देव दीपावली इस वर्ष देवरिया के प्रसिद्ध दुग्धेश्वर नाथ मंदिर परिसर में भव्यता के साथ मनाई गई। मंदिर प्रांगण और उसके पीछे स्थित गिरजा सरोवर पोखरे के किनारे दीपों की लंबी श्रृंखला से पूरा क्षेत्र दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। हजारों दीपों की झिलमिलाहट ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।
इस मनमोहक आयोजन में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल मुख्य यजमान के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की और जिले में सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। आयोजन का शुभारंभ आचार्य आदित्य पांडे द्वारा गंगा पूजन के साथ किया गया, जिसके बाद वाराणसी से आए ब्राह्मण आचार्य रोहित तिवारी और उनकी टीम ने पारंपरिक विधि-विधान से गंगा आरती संपन्न कराई। टीम में सुमित पांडेय, आशुतोष पांडेय, सुगंध पांडेय और वेदांत पांडेय भी शामिल थे।
आरती के समय पूरा गिरजा सरोवर क्षेत्र शंख, घंटा और घड़ियालों की ध्वनि से गूंज उठा। श्रद्धालु “हर हर गंगे” और “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ भगवान शिव और मां गंगा की आराधना में लीन हो गए। सरोवर के चारों ओर दीपों की कतारें लहराती जलधारा में प्रतिबिंबित होकर एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण निर्मित कर रही थीं। भक्तों ने कहा कि देव दीपावली का यह आयोजन अब रुद्रपुर क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां दूर-दराज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे, जिन्होंने गिरजा सरोवर की भव्य सजावट और आरती के दृश्य को कैमरों में कैद किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा की आत्मा को जीवित रखते हैं। उन्होंने देव दीपावली को केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया।
डीएम ने कहा, “देव दीपावली केवल दीपों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, संस्कृति और सामूहिक सहयोग का उज्जवल प्रतीक है। यह पर्व हमें जोड़ता है, हमारी विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस परंपरा को आगे बढ़ाएं ताकि देवरिया की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त हो सके।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर और सरोवर क्षेत्र में सुरक्षा व व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन और नगर निकाय की ओर से विशेष प्रबंध किए गए थे। सैकड़ों दीपों के साथ सरोवर के दोनों तटों पर रंग-बिरंगी रोशनियों, पुष्प सजावट और आरती की लौ ने देव दीपावली के पावन पर्व को एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया।
पूरे आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को गहराई दी, बल्कि देवरिया की सांस्कृतिक एकजुटता और सामुदायिक भावना का सुंदर उदाहरण भी प्रस्तुत किया। जैसे-जैसे रात गहराती गई, दीपों की लौ और भक्तों की भक्ति से गिरजा सरोवर का हर कोना जगमगा उठा — मानो देवताओं ने स्वयं आकर दीपोत्सव में भाग लिया हो।
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