नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को देश के सभी व्यस्त हवाई अड्डों पर एयर ट्रैफिक सर्विसेज मैसेज हैंडलिंग सिस्टम (AMHS) को अनिवार्य रूप से अपग्रेड करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि मौजूदा AMHS सॉफ्टवेयर में बार-बार खामियाँ सामने आ रही हैं और इसकी वजह से एयर ट्रैफिक प्रबंधन में बाधा उत्पन्न होती है। इसलिए 90 दिनों के भीतर नया, अधिक सुरक्षित और स्थिर AMHS सिस्टम इंस्टॉल करना आवश्यक है। यह नया सिस्टम एयर ट्रैफिक मैसेजिंग, संचार और डेटा एक्सचेंज को और तेज, विश्वसनीय तथा त्रुटि-रहित बनाएगा।
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा शुक्रवार देर रात दिल्ली एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) केंद्र पहुंचे। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी टीमों के साथ गहन समीक्षा की और रात 2 बजे तक ATC की स्थिति का जायजा लिया। शनिवार की शाम को भी उन्होंने दूसरे राउंड की समीक्षा बैठक करते हुए यह सुनिश्चित किया कि सिस्टम अपग्रेड और रिकवरी उपाय समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।
दिल्ली ATC में काम करने वाले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स (ATCOs) लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठा रहे थे। ATCOs की नौकरी अत्यधिक तनावपूर्ण होती है, जिसमें 24 घंटे लगातार सतर्कता, तेज निर्णय क्षमता और तकनीकी सटीकता की आवश्यकता होती है। लेकिन इसके बावजूद कई वर्षों से ATCOs को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा था। इनमें सबसे मामूली लेकिन आवश्यक मांग चाय और कॉफी वेंडिंग मशीन की उपलब्धता थी, क्योंकि रात के समय कैंटीन बंद होने से उन्हें कार्य के दौरान आवश्यक पेय पदार्थ उपलब्ध नहीं हो पाते थे।
उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा के साथ हुई हालिया समीक्षा बैठक में ATCOs ने इस मांग को फिर से रखा। समझा जाता है कि सचिव ने इसे तत्काल मंजूर कर दिया है और वेंडिंग मशीनों के लिए आवश्यक अनुमोदन जारी कर दिया गया है। इस कदम को ATCOs के मनोबल को बढ़ाने और बेहतर कार्य परिस्थितियाँ प्रदान करने की दिशा में छोटा लेकिन महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
दिल्ली एयरपोर्ट की तकनीकी खराबी ने स्पष्ट कर दिया है कि तेजी से बढ़ते विमानन यातायात के अनुरूप भारत को अपने तकनीकी ढांचे को तत्काल सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। 90 दिनों में नया AMHS सिस्टम लागू करने का सरकारी निर्देश इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे भविष्य में ऐसी प्रणालीगत विफलताओं को रोका जा सकेगा और भारत की एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट क्षमता अधिक मजबूत एवं सुरक्षित बनेगी।