द देवरिया न्यूज़ : देवरिया के बहुचर्चित एसएस माल प्रकरण में मंगलवार को एक और अहम मोड़ आया, जब एडीजे अदालत ने आरोपी गौहर अंसारी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता, पीड़िता के बयान और जांच पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए आरोपी को इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है। इस फैसले के साथ आरोपी को जेल में ही रहना होगा।
इससे पहले इस मामले के मुख्य आरोपी एसएस माल के स्वामी उस्मान गनी तथा उसके भाई इसराफिल की जमानत याचिकाएं भी न्यायालय द्वारा निरस्त की जा चुकी हैं। तीनों आरोपियों की लगातार खारिज हुई याचिकाएं यह दर्शाती हैं कि न्यायालय इस मामले को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मानते हुए विवेचना को प्राथमिकता दे रहा है। वर्तमान में गौहर अंसारी जिला कारागार में बंद है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
यह मामला मदनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में घटित घटना से जुड़ा है। पीड़िता ने 7 सितंबर को सदर कोतवाली पहुंचकर विस्तृत तहरीर दी थी। तहरीर में युवती ने आरोप लगाया कि उसे एक बहाने से बुलाया गया, फिर जबरन बंधक बना लिया गया और उसके साथ गलत कृत्य का प्रयास किया गया। युवती ने अपने बयान में बताया कि विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पीड़िता की इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी उस्मान गनी, उसके साले गौहर अंसारी, और उसकी पत्नी तरन्नुम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और उसी दिन से मामले की गहन जांच शुरू कर दी। पुलिस द्वारा पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 CrPC के तहत दर्ज कराया गया, जिससे मामले की कानूनी मजबूती और बढ़ गई।
गिरफ्तारियों की श्रृंखला और जांच की प्रगति
तहरीर दर्ज होने के कुछ ही दिनों बाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली।
15 सितंबर को एसओजी और पुलिस की संयुक्त टीम ने मुख्य आरोपी उस्मान गनी को लखनऊ से गिरफ्तार किया।
आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।
इसके बाद उसके भाई इसराफिल को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
वहीं, गौहर अंसारी को खुखुंदू पुलिस पहले से ही धर्मांतरण से जुड़े एक अन्य प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी।
अक्टूबर में अदालत ने दोनों अन्य आरोपियों—उस्मान गनी और इसराफिल—की नियमित जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं। अब गौहर अंसारी की याचिका के खारिज होने से यह पूरा प्रकरण फिर चर्चा में आ गया है।
किन धाराओं में दर्ज है मुकदमा?
गौहर अंसारी उर्फ गौहर अली उर्फ शप्तरंग पर निम्न गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है:
धारा 354 IPC – यौन उत्पीड़न का प्रयास
धारा 506 IPC – आपराधिक धमकी
धर्मांतरण अधिनियम 3/5(1) – बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन से जुड़े आरोप
आईटी एक्ट 67A – इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री साझा करने का आरोप
ये धाराएं संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृति की मानी जाती हैं, जिनमें जमानत आसानी से नहीं दी जाती।
अभियोजन पक्ष का तर्क और अदालत का रुख
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने जमानत के समर्थन में कई कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जैसे कि आरोपी पर लगाए गए आरोप झूठे एवं राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, और विवेचना में उसकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका सिद्ध नहीं हुई है। हालांकि, अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने इन सभी दलीलों का सख्ती से विरोध किया।
सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी को जमानत देने से मामले की जांच प्रभावित हो सकती है, साथ ही गवाहों पर दबाव या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद जमानत अस्वीकार कर दी।
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