जानकारी के मुताबिक, उप जिलाधिकारी (एसडीएम) हरिशंकर लाल को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के कुछ लोग बड़ी मात्रा में डीजल जमा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही उन्होंने आपूर्ति विभाग और पुलिस टीम को साथ लेकर तत्काल छापेमारी की योजना बनाई। संयुक्त टीम ने गांव में पहुंचकर वीर बहादुर यादव और रामानंद के घरों पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान वीर बहादुर यादव के घर से 15 ड्रमों में लगभग 3000 लीटर डीजल बरामद हुआ, जबकि रामानंद के घर से 3 ड्रमों में करीब 600 लीटर डीजल मिला। इस तरह कुल 3600 लीटर डीजल जब्त किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में ईंधन मिलने से प्रशासन भी सतर्क हो गया है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
पूछताछ में दोनों व्यक्तियों ने बताया कि उनके पास कंबाइन मशीन और ट्रैक्टर हैं, जिनके संचालन के लिए उन्होंने डीजल का भंडारण किया था। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि घरेलू स्तर पर इतनी बड़ी मात्रा में डीजल रखना नियमों के खिलाफ है। इससे न केवल सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ते हैं, बल्कि कालाबाजारी और कृत्रिम संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
एसडीएम हरिशंकर लाल ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की नजर ऐसे सभी मामलों पर है और आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
इस घटना के बाद प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे पेट्रोल-डीजल की कमी से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान न दें। लोगों से कहा गया है कि वे केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें और अनावश्यक भंडारण से बचें। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा खरीद और भंडारण से बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कहीं भी जमाखोरी या कालाबाजारी की सूचना मिलती है, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी रहे और किसी तरह का कृत्रिम संकट पैदा न हो।
कुल मिलाकर, देवरिया में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है और यह संदेश देती है कि अफवाहों के माहौल में कानून व्यवस्था और आपूर्ति प्रणाली को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।