द देवरिया न्यूज़,गोंडा : नंदिनी नगर में आयोजित आठ दिवसीय राष्ट्रकथा महोत्सव के समापन के बाद पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकथा को लेकर अगर बाहुबली चेहरों की चर्चा हो रही है तो लोगों को यह भी देखना चाहिए कि “हम अयोध्या से एक माई को उठाकर लाए हैं।” उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपनी भावना के अनुसार कथा और घटनाओं का अर्थ निकाल रहा है।
राष्ट्रकथा के दौरान कई बार भावुक होने के सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि भावुक होना उनके स्वभाव का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “जब मैं अत्यंत प्रसन्न होता हूं या जब प्रभु से तार जुड़ जाता है, तब मेरी आंखों से आंसू निकल आते हैं। आप लोगों ने मुझे हजारों बार रोते हुए देखा है, इसमें नई बात क्या है।”
बिना अनुभव के हुआ भव्य आयोजन
मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह पहला राष्ट्रकथा महोत्सव था और इसके आयोजन का उन्हें कोई पूर्व अनुभव नहीं था। न तो किसी तरह का इवेंट मैनेजमेंट किया गया और न ही विशेष तैयारी थी, लेकिन सालभर चलने वाले सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों की वजह से इतनी बड़ी राष्ट्रकथा संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि इसमें नंदिनी नगर परिवार, उनके परिवार, जिले और आसपास के जिलों के इष्ट-मित्रों का पूरा सहयोग रहा।
शक्ति प्रदर्शन के सवाल पर दिया दोहे से जवाब
राष्ट्रकथा के दौरान राजनीतिक चेहरों और बाहुबली नेताओं की मौजूदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा,
“जाकी रही भावना जैसी, हरि मूरत देखी तिन तैसी।”
उन्होंने कहा कि लोग अपनी-अपनी सोच के अनुसार इसका विश्लेषण करेंगे। अगर बाहुबली आए तो उनकी चर्चा हुई, लेकिन जिस शांति देवी माई को अयोध्या से लाया गया, उसकी पहचान और महत्व को भी समझना चाहिए।
‘सबकी भागीदारी ही उद्देश्य’
उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रकथा का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना था और इसमें वे सफल रहे। आसपास के राज्यों और देशभर से लोग इस आयोजन से जुड़े। मीडिया और प्रशासन की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से ही यह कथा उन लोगों तक पहुंच सकी जो स्वयं यहां नहीं आ सके। उन्होंने कहा कि जब वे उन सभी लोगों को याद करते हैं जिन्होंने किसी न किसी रूप में योगदान दिया—चाहे वह बथुआ देने वाला हो या व्यवस्था संभालने वाला—तो उनकी आंखें भर आती हैं।
बथुआ बना जनभागीदारी का प्रतीक
राष्ट्रकथा के दौरान ‘बथुआ’ के ब्रांड बनने पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य गरीब से गरीब व्यक्ति को इस कथा से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि जब कोई एक लौकी, एक कद्दू, दो रुपये या 500 ग्राम तेल दान में देता है, तो वही असली जनभावना होती है। मुस्लिम समाज सहित कोई भी समुदाय ऐसा नहीं रहा जो इस आयोजन से अलग रहा हो। उन्होंने बताया कि 52 धर्मों और समाजों के चित्र लगाए गए और इस राष्ट्रकथा में गाई गई राष्ट्रगाथा को जिसने सुना, उसका जीवन धन्य हो गया।
अंत में उन्होंने दोहा सुनाते हुए कहा,
“प्रभु की कृपा भयो सब काजू, जन्म हमार सफल भयो आजू।”
उन्होंने विश्वास जताया कि जब भी राष्ट्रकथा की चर्चा होगी, तो गोंडा का नाम और इस आयोजन का उल्लेख जरूर किया जाएगा।
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