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तुर्की ने ‘इस्लामिक नाटो’ की अटकलों को किया खारिज, पाकिस्तान की कोशिशों को झटका

Published on: January 31, 2026
Turkey launched 'Islamic NATO'

द देवरिया न्यूज़,अंकारा : तुर्की ने किसी नए भू-राजनीतिक या सैन्य गुट में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री हाकान फिदान ने साफ कहा है कि तुर्की किसी “नए भू-राजनीतिक ब्लॉक” का हिस्सा बनने में दिलचस्पी नहीं रखता। उनके इस बयान को पाकिस्तान द्वारा कथित तौर पर “इस्लामिक नाटो” जैसे ढांचे को आगे बढ़ाने की कोशिशों के लिए झटका माना जा रहा है।

हाल के दिनों में ऐसी चर्चाएं थीं कि तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच संभावित रक्षा सहयोग या समझौते का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, फिदान के बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रुख को सऊदी अरब के लिए भी एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

‘अपनी सुरक्षा आउटसोर्स न करें’

हाकान फिदान ने कहा, “अपनी सुरक्षा आउटसोर्स न करें।”
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या केवल बाहरी हस्तक्षेप नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच भरोसे की गहरी कमी है। उनके अनुसार, जब तक देश अपनी समस्याओं की जिम्मेदारी खुद नहीं लेंगे, तब तक स्थायी स्थिरता संभव नहीं है।

फिदान ने कहा कि तुर्की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था का समर्थन करता है जो एकजुटता, संस्थागत ढांचे और साझा जिम्मेदारी पर आधारित हो, न कि बाहरी शक्तियों पर निर्भरता पर।

पाकिस्तान-सऊदी रक्षा ढांचे से दूरी

तुर्की के विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी क्षेत्रीय व्यवस्था समावेशी होनी चाहिए। उन्होंने कहा,
“कोई तुर्की प्रभुत्व नहीं, कोई अरब प्रभुत्व नहीं, कोई फारसी प्रभुत्व नहीं और न ही किसी अन्य का प्रभुत्व।”

उन्होंने जोर दिया कि तुर्की का लक्ष्य किसी पदानुक्रम या वर्चस्व की स्थापना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और समान भागीदारी वाली क्षेत्रीय कार्रवाई है। फिदान के अनुसार, कोई मंच भले ही दो-तीन देशों से शुरू हो, लेकिन समय के साथ उसे सर्व-समावेशी बनना चाहिए।

मध्य पूर्व में तुर्की की बढ़ती भूमिका

हाल के वर्षों में तुर्की ने मध्य पूर्व में अपने कूटनीतिक और रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाया है। सऊदी अरब के साथ उसके संबंधों में सुधार देखने को मिला है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ रिश्तों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

फिलिस्तीन के मुद्दे पर तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के रुख में समानता देखी जाती है। वहीं, यूएई अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ अपने संबंध सामान्य कर चुका है। दूसरी ओर, गाजा युद्ध को लेकर तुर्की और इजरायल के रिश्तों में गंभीर तनाव बना हुआ है।


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