द देवरिया न्यूज़,नुक (ग्रीनलैंड) : ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार आक्रामक बयानों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव गहराता जा रहा है। ट्रंप बार-बार ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात कह रहे हैं और इस मुद्दे पर दबाव बना रहे हैं। इसी बीच ग्रीनलैंड प्रशासन ने अपने नागरिकों को संभावित संकट की स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।
ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे किसी भी आपात स्थिति में कम से कम पांच दिनों के लिए जरूरी सामान अपने पास जमा करके रखें। यह सलाह ट्रंप के दावोस में दिए गए उस भाषण के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपे जाने की मांग दोहराई और चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर वे इसे याद रखेंगे। हालांकि, ग्रीनलैंड प्रशासन का कहना है कि नागरिक सुरक्षा को लेकर तैयार की गई यह मॉडल पुस्तिका किसी खास खतरे का संकेत नहीं है। इस दस्तावेज में ट्रंप या अमेरिका का कोई जिक्र नहीं है। ग्रीनलैंड के मंत्री पीटर बोर्ग ने स्पष्ट किया कि यह ब्रोशर पिछले साल से ही तैयार किया जा रहा था और इसका मकसद केवल घरों के लिए व्यावहारिक व आसान सुरक्षा सलाह देना है, न कि किसी आसन्न संकट की घोषणा करना।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप ने दावा किया है कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए उनके पास एक ठोस फ्रेमवर्क मौजूद है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते थे, लेकिन ऐसा न करने से गलत संदेश जा सकता था। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके मन में ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के लिए सम्मान है, लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिका के अलावा कोई भी देश ग्रीनलैंड की प्रभावी रक्षा नहीं कर सकता।
ट्रंप ने दूसरे विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि जब जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्जा किया था, तब अमेरिका ने ही ग्रीनलैंड की रक्षा की थी और बाद में उसे वापस कर दिया। इसे उन्होंने अमेरिका की “बड़ी गलती” करार दिया और डेनमार्क को एहसान फरामोश तक कह डाला। ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका ने उस समय दखल नहीं दिया होता, तो आज ग्रीनलैंड के लोग जर्मन और कुछ हद तक जापानी भाषा बोल रहे होते।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसे अमेरिका में शामिल करने की उनकी मंशा वहां मौजूद दुर्लभ खनिजों के कारण नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा कारणों से है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका इस मुद्दे पर ग्रीनलैंड को अपने साथ जोड़ने के लिए जल्द बातचीत शुरू करना चाहता है।
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