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ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: अब कहा– अमेरिका को चाहिए विदेशी प्रतिभा, H-1B वीजा रहेगा जारी

Published on: November 13, 2025
Trump's big U-turn where now
द देवरिया न्यूज़ /वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने पुराने रुख से हटते हुए H-1B वर्क वीजा को लेकर नरमी दिखाई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को कुछ क्षेत्रों में विदेशी प्रतिभाओं की जरूरत है, इसलिए H-1B वीजा को जारी रखा जाना चाहिए। ट्रंप का यह बयान खासतौर पर भारतीयों के लिए राहत लेकर आया है, क्योंकि इस वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी भारतीय पेशेवर वर्ग रहा है।
दरअसल, हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा की फीस में कई गुना बढ़ोतरी की थी और इसे अमेरिकी नौकरियों के लिए खतरा बताया था। अब राष्ट्रपति ट्रंप के इस रुख में बदलाव से कई विशेषज्ञ इसे नीति में बड़े परिवर्तन के रूप में देख रहे हैं।
फॉक्स न्यूज इंटरव्यू में ट्रंप का बयान
फॉक्स न्यूज की पत्रकार लॉरा इंग्राहम से बातचीत में जब ट्रंप से H-1B वीजा और इमिग्रेशन पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “हम बाहरी लोगों के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। निश्चित रूप से दुनिया भर से प्रतिभाशाली लोगों को लाना होगा।”
जब पत्रकार ने उनसे कहा कि अमेरिका में भी पर्याप्त प्रतिभाशाली लोग हैं, तो ट्रंप ने जवाब दिया, “हमारे पास हर क्षेत्र में जरूरी प्रतिभा नहीं है। कुछ क्षेत्रों में हमें विदेशों से कुशल लोगों की जरूरत पड़ती है।”
पहले दिखाया था सख्त रुख
इस साल जनवरी में दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने इमिग्रेशन पर बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने अवैध प्रवासियों को देश से निकालने का अभियान शुरू किया और वीजा नियमों में कई बदलाव किए थे। सितंबर में उनके प्रशासन ने H-1B वीजा पर 100,000 डॉलर का आवेदन शुल्क लगा दिया था, जिससे विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना कठिन हो गया था।
भारतीय पेशेवरों को मिलेगी राहत
ट्रंप का यह नया बयान भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारत के इंजीनियरों, आईटी विशेषज्ञों और डॉक्टरों द्वारा किया जाता है। अमेरिकी तकनीकी कंपनियां—जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और इन्फोसिस—इसी वीजा के जरिए भारत सहित अन्य देशों से कुशल कर्मियों को नियुक्त करती हैं।
विश्लेषकों ने कहा– यह एक रणनीतिक बदलाव
अर्थशास्त्रियों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख अमेरिकी टेक उद्योग पर बढ़ते दबाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए लिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियों को नवाचार और तकनीकी विकास के लिए भारतीय पेशेवरों की विशेषज्ञता की जरूरत है।
ट्रंप का यह बयान आने वाले महीनों में अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में सकारात्मक बदलावों का संकेत देता है। अगर ऐसा होता है तो इससे न केवल भारतीय आईटी सेक्टर को लाभ होगा, बल्कि अमेरिका और भारत के आर्थिक संबंध भी और मजबूत होंगे।

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