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यूपी में सड़क हादसों पर लगाम के लिए 233 थानों में बनी स्पेशल क्रिटिकल टीम, डीजीपी ने दी जानकारी

Published on: November 6, 2025
To control road accidents in UP

द देवरिया न्यूज़,लखनऊ। प्रदेश में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बड़ी पहल की है। राज्य के 233 थानों को दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र (Accident-Prone Zones) के रूप में चिह्नित करते हुए वहां स्पेशल क्रिटिकल टीम (Special Critical Team) का गठन किया गया है। ये टीमें न केवल अपने क्षेत्र में सड़क सुरक्षा उपायों को लागू कराने का कार्य करेंगी, बल्कि हादसों की जांच और उनकी जड़ों तक पहुंचने की जिम्मेदारी भी निभाएंगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद इस योजना को डीजीपी राजीव कृष्ण ने सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश में सड़क हादसों से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए ठोस और जमीनी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीजीपी ने एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में योजना की शुरुआत कराई, जो सफल रहने के बाद अब प्रदेश के सभी संबंधित थानों में लागू कर दी गई है।

सड़क हादसों पर रोक के लिए ठोस योजना

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि बीते दिनों सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में 100 ऐसे जिलों को चिह्नित किया था, जहां सड़क दुर्घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के 20 जिले शामिल हैं। इन जिलों में 89 क्रिटिकल कॉरिडोर और 3233 क्रिटिकल पॉइंट की पहचान की गई है।

राज्य स्तर पर इन क्षेत्रों में बीते दो महीनों के भीतर एडीजी, डीआईजी और एसपी रैंक के अधिकारियों को भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान दुर्घटनाओं के कारणों — जैसे सड़क की संरचना, दृश्यता, साइन बोर्ड, ओवरस्पीडिंग, मोड़ की स्थिति और ट्रैफिक मैनेजमेंट — का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी आधार पर वृहद कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य सड़क हादसों को न्यूनतम स्तर तक लाना है।

टीम की संरचना और जिम्मेदारी

नई गठित स्पेशल क्रिटिकल टीम में प्रत्येक थाने से एक उपनिरीक्षक (SI) और चार आरक्षी (Constables) शामिल किए गए हैं। इन टीमों का प्रमुख कार्य है —

  1. अपने क्षेत्र में सड़क सुरक्षा से जुड़े सुधारों के लिए सुझाव देना।

  2. प्रत्येक दुर्घटना की विस्तृत जांच करना।

  3. जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति को हादसों के कारणों से अवगत कराना।

  4. भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय लागू कराना।

टीम को सड़क हादसों की जांच के तकनीकी पहलुओं पर विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी भी की जा रही है। इसमें रोड इंजीनियरिंग, ट्रैफिक साइंस और फोरेंसिक एनालिसिस से संबंधित प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल होंगे।

शुरुआती नतीजे उत्साहजनक

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि बीते दो महीनों में जिन मार्गों पर यह पायलट प्रोजेक्ट लागू किया गया, वहां सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इन क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई है। परियोजना के तहत दुर्घटना के हॉटस्पॉट की पहचान कर रोड इंजीनियरिंग में सुधार, अवरोध हटाने, दृश्यता बढ़ाने, हेल्पलाइन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपात चिकित्सा संसाधनों को सुदृढ़ करने जैसे कदम उठाए गए।

उन्होंने बताया कि कई क्रिटिकल कॉरिडोर 10-15 किलोमीटर से लेकर 50-60 किलोमीटर तक फैले हुए हैं। वहां सड़क सुरक्षा उपायों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।

अगला लक्ष्य: शहरों को जाममुक्त बनाना

डीजीपी ने कहा कि सड़क सुरक्षा अभियान के अगले चरण में शहरों को जाममुक्त बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके तहत ट्रैफिक प्रबंधन को तकनीकी सहायता से सुदृढ़ किया जाएगा और स्मार्ट सिग्नलिंग सिस्टम लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में कमी केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। यातायात नियमों का पालन और जागरूकता इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस प्रकार, उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर यह पहल राज्य में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस कदम साबित हो रही है।


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