बीजेपी नेता और बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद कुमार ने तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा को संदिग्ध बताते हुए इसकी गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिस तरह तेजस्वी के परिवार की संपत्तियों की जांच हो रही है, उसी तरह उनकी विदेश यात्रा की भी जांच होनी चाहिए। वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने विधानसभा सत्र के दौरान अचानक विदेश जाने को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।
इस मामले को और गंभीर बनाते हुए जेडीयू के एमएलसी नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के साथ विदेश यात्रा पर दो ऐसे लोग भी गए थे, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड बताया जा रहा है। नीरज कुमार के अनुसार, इनमें रमीज नेमत खान शामिल है, जिस पर उत्तर प्रदेश में हत्या का आरोप है, जबकि देव गुप्ता 28 मामलों में आरोपी है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। इस संबंध में नीरज कुमार ने डीजीपी को पत्र भी लिखा है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी यादव निजी विदेश यात्रा पर गए हों। वे इससे पहले भी कई बार परिवार के साथ विदेश जा चुके हैं। लेकिन चूंकि वे जमीन के बदले नौकरी समेत कई मामलों में आरोपी हैं, इसलिए उनकी विदेश यात्रा के लिए अदालत से अनुमति लेना आवश्यक होता है। दिसंबर 2023 में उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें राउस एवेन्यू कोर्ट से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की अनुमति मिली थी। सितंबर 2024 में भी कोर्ट ने उन्हें दुबई यात्रा की इजाजत दी थी।
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, किसी भी मंत्री या नेता प्रतिपक्ष को विदेश यात्रा से पहले सरकार और संबंधित एजेंसियों को जानकारी देना जरूरी होता है, ताकि ‘येलो बुक’ प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तेजस्वी यादव ने इस बार सरकार, विदेश मंत्रालय या अदालत से आवश्यक मंजूरी ली थी या नहीं।
तेजस्वी यादव की इस यात्रा को लेकर विपक्ष की भूमिका और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नई विधानसभा के गठन और पहले सत्र के दौरान विदेश जाना, जबकि वे एक संवैधानिक पद पर हैं, उनकी जिम्मेदारियों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि तेजस्वी यादव को इस यात्रा से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।
अब जबकि तेजस्वी यादव विदेश से लौट चुके हैं, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि उन्हें अपनी यात्रा, मंजूरी और उनके साथ गए लोगों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि वे चुप्पी साधे रहते हैं, तो यह विवाद और गहराने के साथ-साथ उनकी राजनीतिक छवि पर भी असर डाल सकता है।