द देवरिया न्यूज़ : दीपावली की जगमगाहट के साथ देश की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। पटाखों की तेज़ आवाज़ और धुएं ने वातावरण को इतना दूषित कर दिया कि दिवाली के अगले ही दिन देश के 16 प्रमुख शहरों की हवा “बेहद खराब” से लेकर “गंभीर” श्रेणी में पहुंच गई। इनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के शहर शामिल हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, देश में सबसे खराब स्थिति हरियाणा के जींद में दर्ज की गई, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 421 रहा — जो “गंभीर श्रेणी” में आता है। वहीं हरियाणा के धारूहेड़ा में AQI 412 दर्ज किया गया। दिल्ली-एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद पटाखों की जमकर आतिशबाजी हुई। अदालत ने रात 8 से 10 बजे तक केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी, लेकिन लोग देर रात तक आतिशबाजी करते रहे। नतीजा यह हुआ कि हवा में सूक्ष्म धूलकण (PM 2.5) का स्तर अचानक कई गुना बढ़ गया और राजधानी की हवा दमघोंटू बन गई।
दिल्ली में चार साल में सबसे खराब दिवाली
सीपीसीबी के डाटा के मुताबिक, इस वर्ष दिवाली की रात दिल्ली का PM 2.5 स्तर 675 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2021 के बाद सबसे अधिक है। तुलना करें तो 2021 में यह स्तर 728, 2022 में 534, 2023 में 570 और 2024 में 609 दर्ज किया गया था।
दिवाली के बाद मंगलवार को दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता “बेहद खराब” श्रेणी में दर्ज हुई, जहां AQI 351 रहा।
एनसीआर में गुरुग्राम की हवा सबसे अधिक दूषित रही, यहां AQI 370, जबकि गाजियाबाद में 324, नोएडा में 320, ग्रेटर नोएडा में 282 और फरीदाबाद में 268 दर्ज किया गया।
दिल्ली में यह चार साल की सबसे खराब दिवाली रही। विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों के धुएं के साथ-साथ पराली जलाने की घटनाएं और ठंडी हवा के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के नजदीक जमा हो गए, जिससे वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई।
स्विस एजेंसी ने दिल्ली को बताया ‘दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर’
स्विटजरलैंड की पर्यावरण निगरानी एजेंसी IQAir के अनुसार, दिवाली के बाद दिल्ली दुनिया के सभी शहरों में सबसे प्रदूषित शहर बन गया।
एजेंसी के डाटा के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली का AQI 442 रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानकों से 59 गुना अधिक प्रदूषण स्तर दर्शाता है।
IQAir की रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली की हवा में PM 2.5 कणों की मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। ये 2.5 माइक्रोन से भी छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक प्रवेश कर सकते हैं और लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय रोग, स्ट्रोक, अस्थमा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
यूपी के तीन शहर टॉप-10 में
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (AQI 324), नोएडा (AQI 320) और हापुड़ (AQI 314) देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
हरियाणा में नारनौल (390), रोहतक (376), गुरुग्राम (370) और बहादुरगढ़ (368) में भी वायु गुणवत्ता “बेहद खराब” रही।
राजस्थान के भिवाड़ी (364) और गुजरात के नंदेसरी (303) में भी स्थिति चिंताजनक रही।
पराली जलाने से फिर बढ़ी मुसीबत
दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में पंजाब और हरियाणा से आने वाला पराली का धुआं भी एक बड़ा कारण बना।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 353 तक पहुंच गई है, जो पिछले 10 दिनों में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्शाती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) के अनुसार, दिल्ली की हवा में प्रदूषण का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा पराली जलाने से उत्पन्न धुएं का है।
राहत की उम्मीद फिलहाल नहीं
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के मौसम पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक, आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
हवा की गति धीमी रहने और तापमान गिरने से प्रदूषक कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक हवा “खराब” से “बेहद खराब” श्रेणी में ही बनी रहेगी।
सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोगों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का उपयोग सीमित करें, सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग बढ़ाएं और अनावश्यक रूप से पटाखे या कचरा न जलाएं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले देशभर में पटाखों पर सख्त प्रतिबंध लगाते हुए केवल “ग्रीन पटाखों” की अनुमति दी थी। साथ ही, इन्हें रात 8 से 10 बजे के बीच ही जलाने की छूट दी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं। कई जगहों पर देर रात तक आतिशबाजी जारी रही, जिससे वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ती चली गई।
प्रदूषण से दो करोड़ लोग प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, हर सर्दी में दिल्ली और उसके आसपास के जिले (एनसीआर) गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। वाहनों के धुएं, निर्माण कार्यों की धूल, पराली के धुएं और ठंडी हवा के मेल से वातावरण में प्रदूषक कण फंस जाते हैं। इससे लगभग दो करोड़ से अधिक लोग सीधे प्रभावित होते हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक असर पड़ता है।
दिवाली की रौनक भले ही लोगों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आई हो, लेकिन इसके बाद की सुबह ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया — क्या हम अपनी खुशी की कीमत अपनी सांसों से चुका रहे हैं? जब तक सख्त नियंत्रण और जनजागरूकता साथ नहीं चलेंगे, तब तक दीपों का त्योहार हर साल जहरीली हवा का त्योहार बनता जाएगा।
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