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45 साल बाद घर लौटा बेटा: कुशीनगर के परिवार में खुशी की लहर, SIR फॉर्म बना बिछड़ों का मिलन कारण

Published on: December 3, 2025
Son returned home after 45 years

द देवरिया न्यूज़,कुशीनगर : कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र में मंगलवार दोपहर एक परिवार के लिए ऐसा पल आया, जिसने 45 साल पुराने दर्द को खुशी में बदल दिया। अचानक दरवाजे पर पहुंचे एक व्यक्ति को देखकर घर वाले स्तब्ध रह गए—वह उनका बेटा तैयब अली था। घर छोड़कर गए तैयब अब लगभग 60 वर्ष के हो चुके हैं। उन्हें देखकर परिवार की आंखें भर आईं और माहौल भावुक हो गया।

सिसवा गोपाल के सिसही गांव में दशकों बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला। साल 1980 में महज 15 वर्ष की उम्र में तैयब घर छोड़कर चले गए थे। घर में लगातार विवाद, भाइयों में कलह और बिगड़ते माहौल ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद परेशान कर दिया था। वही परेशानी उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर गई।

पंजाब से राजस्थान, फिर गुजरात और शामली तक का सफर

घर छोड़ने के बाद तैयब सबसे पहले पंजाब पहुंचे, जहां करीब 15 वर्षों तक मजदूरी सहित कई काम किए। इसके बाद वे राजस्थान गए और रेलवे में लेबर का काम किया। फिर गुजरात के गांधीधाम, कांदला में कुछ समय रहे। आगे चलकर वह उत्तर प्रदेश के शामली जिले में जाकर बस गए और लेबर का काम करने लगे। शामली में उनकी मुलाकात मैरून नाम की महिला से हुई, जिनसे उन्होंने शादी कर ली। दो बच्चों के जन्म के बाद वहीं उनका परिवार बस गया। कांधला शहर में किराए के घर में रहते हुए उन्होंने नई जिंदगी बना ली।

SIR फॉर्म बना घर वापसी का कारण

तैयब बताते हैं कि सरकार के SIR फॉर्म ने उनके जीवन में अहम मोड़ ला दिया। फॉर्म भरने के लिए पिता के दस्तावेजों की जरूरत पड़ी, लेकिन स्थानीय निवासी न होने के कारण यह संभव नहीं था। मजबूरन उन्हें अपने गांव लौटना पड़ा।

वे मुस्कुराते हुए कहते हैं—“हम जैसे बिछड़ों को SIR ने परिवार से मिला दिया। घर आने का मन नहीं था, पर SIR ने आने को मजबूर कर दिया।”

बच्चों की जिद ने तोड़ा सालों का डर

तैयब के अनुसार, उनके बच्चे हमेशा अपने दादा-दादी और परिवार से मिलने की जिद करते थे। उनकी यही चाहत अंततः उन्हें गांव की ओर खींच लाई। “कई बार बच्चों की जिद से गुस्सा आता था, लेकिन आज लगता है कि उसी जिद ने मुझे यहां पहुंचाया,” तैयब कहते हैं।

गांव में भावनाओं का सैलाब

45 साल बाद अचानक उन्हें सामने देखकर परिवार के लोग पहले तो पहचान ही नहीं पाए, लेकिन जैसे ही सच सामने आया, गले लगकर रोने और हंसने का सिलसिला शुरू हो गया। गांव वाले भी भावुक हो उठे। वर्षों बाद की इस वापसी को नए और पुराने सभी लोगों ने एक अनोखे अनुभव की तरह महसूस किया।

गांव में प्रवेश करते हुए तैयब ने कहा—
“45 साल में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन घर की खुशबू आज भी वैसी ही है।”


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