जयराम रमेश ने कहा,
“2008 में जब भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता हुआ था, तब बीजेपी ने कहा था कि परमाणु ऊर्जा का कोई भविष्य नहीं है। उसी करार की वजह से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दरवाजे खुले और आज जो ‘परमाणु ऊर्जा रूपांतरण विधेयक’ लाया गया है, वह उसी प्रक्रिया का परिणाम है।”
2014 के बाद ही सब कुछ हुआ, यह भ्रम: जयराम
कांग्रेस सांसद ने 2014 के बाद के भारत का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी यह बताने की कोशिश करती है कि देश में स्पेस और परमाणु कार्यक्रमों में सारी प्रगति 2014 के बाद ही हुई।
उन्होंने कहा,
“हकीकत यह है कि कांग्रेस के 20 साल के शासनकाल में ही स्पेस और परमाणु सेक्टर को मजबूत आधार मिला। अटल बिहारी वाजपेयी भी कांग्रेस सरकारों के परमाणु कार्यक्रमों का उल्लेख कर चुके हैं। मौजूदा सरकार को उनसे सीख लेनी चाहिए।”
SHANTI विधेयक 2025 पर कड़ी आपत्ति
जयराम रमेश ने दिसंबर 2025 में पेश किए गए SHANTI विधेयक 2025 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह बिल मौजूदा कानूनों—
में बदलाव का प्रस्ताव करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए निजी और विदेशी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश दिलाने की कोशिश कर रही है। इससे सार्वजनिक सुरक्षा, जवाबदेही और राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता हो सकता है और कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार से जवाब की मांग
कांग्रेस सांसद ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि क्या इस विधेयक के जरिए परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजी और विदेशी पूंजी को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दिशा में कोई भी कदम देशहित और सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही उठाया जाना चाहिए।