द देवरिया न्यूज़ : भूखण्ड खरीदने से पहले उसकी मिट्टी, दिशा और आकार का परीक्षण बेहद जरूरी होता है। वास्तु शास्त्र में भूखण्डों के कई आकार बताए गए हैं—वर्गाकार, आयताकार, गोलाकार, त्रिकोणाकार, चक्राकार, शकटाकार, पंखाकार, तबलाकार और शूर्पाकार। इसके अलावा कुछ विशेष आकार के भूखण्ड भी होते हैं, जिनका प्रभाव अलग-अलग माना गया है। आइए इनके बारे में जानें—
गोमुखाकार भूखण्ड
जिस भूखण्ड की चौड़ाई आगे से कम और पीछे से अधिक होती है, उसे गोमुखाकार कहा जाता है।
निवास के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
घर बनवाकर रहने के लिए यह उत्तम है।
व्यापार के लिए प्रयोग करना वास्तु के अनुसार ठीक नहीं, क्योंकि ग्रहदशा प्रतिकूल होने पर नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
सिंहमुखाकार भूखण्ड
जिस भूखण्ड की चौड़ाई आगे से अधिक और पीछे से कम होती है, उसे सिंहमुखाकार कहा जाता है।
व्यापार-व्यवसाय के लिए अत्यंत शुभ।
ऐसे भूखण्ड पर व्यवसाय तेजी से फलता-फूलता है।
लेकिन निवास के लिए यह आकार अनुकूल नहीं माना जाता।
टी आकार का भूखण्ड
यदि भूखण्ड का आकार अंग्रेजी के अक्षर T जैसा हो, तो यह वास्तु में अशुभ माना जाता है।
यह आकार कष्टकारक, रोगकारक और अनिष्टकारक प्रभाव दे सकता है।
किसी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह से अतिरिक्त भाग हटाकर इसका समाधान किया जा सकता है।
षट्कोणाकार भूखण्ड
जिस भूखण्ड की छह भुजाएँ हों, उसे षट्कोणाकार कहा जाता है।
ऐसे भूखण्ड पर निवास शुभ माना गया है।
दो दिशाओं में त्रिकोणीय होने के कारण कोई अशुभ प्रभाव नहीं रहता।
वास्तु सुधार के बाद यह धन-समृद्धि और उन्नति प्रदान करता है।
अष्टकोणाकार भूखण्ड
जिस भूखण्ड के आठ कोण हों, उसे अष्टकोणाकार कहा जाता है।
यह भी षट्कोणाकार की तरह शुभफलदायी माना जाता है।
ऐसे भूखण्ड पर निवास करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
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