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फरवरी 2026 में RBI घटा सकता है रेपो रेट, 5% तक आने की संभावना: यूनियन बैंक रिपोर्ट

Published on: December 23, 2025
RBI may reduce in February 2026

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फरवरी 2026 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो रेपो रेट घटकर 5% पर आ जाएगा। यह जानकारी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में सामने आई है। RBI की अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 4, 5 और 6 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है।

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक के नरम नीतिगत रुख को देखते हुए फरवरी या अप्रैल 2026 में 25 bps की एक और दर कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI लगातार महंगाई के स्थिर रहने और कीमतों पर दबाव कम होने की बात कर रहा है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि सोने की कीमतों के कारण लगभग 50 bps के महंगाई प्रभाव को अलग कर दिया जाए, तो वास्तविक महंगाई दबाव और भी कम नजर आता है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

यूनियन बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है,
“हमें फरवरी या अप्रैल 2026 में 25 bps की अंतिम दर कटौती की संभावना दिखती है। केंद्रीय बैंक के नरम रुख को देखते हुए हम फरवरी 2026 की बैठक में रेपो रेट को 5% तक लाने की संभावना से इनकार नहीं कर सकते, हालांकि अंतिम दर कटौती का सटीक समय बताना अभी मुश्किल है।”

हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंतिम दर कटौती का समय अनिश्चित बना हुआ है। इसकी एक बड़ी वजह फरवरी 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आधार वर्ष में होने वाला संशोधन है। संशोधित आंकड़े आने के बाद MPC महंगाई और आर्थिक वृद्धि के रुझानों का दोबारा आकलन कर सकती है। ऐसे में केंद्रीय बैंक “प्रतीक्षा करो और देखो” की नीति अपना सकता है।

हाल ही में भी घटाई गई थी दर

गौरतलब है कि RBI ने इसी महीने की शुरुआत में रेपो रेट में 25 bps की कटौती की थी। दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में MPC ने रेपो रेट घटाकर 5.25% कर दिया था। इस फैसले की जानकारी RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 से 5 दिसंबर तक चली MPC की बैठक के बाद दी थी।

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

ब्याज दरों में कटौती से लोन सस्ते हो जाते हैं। होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज कम ब्याज दर पर मिलते हैं, वहीं पहले से चल रहे लोन की ईएमआई भी घट सकती है। इससे आम लोगों को सीधी राहत मिलती है और बचत बढ़ती है। हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाला ब्याज भी कम हो सकता है, जिससे FD निवेशकों को कम रिटर्न मिलेगा। लोन और FD पर ब्याज दरों में बदलाव का अंतिम फैसला बैंकों पर निर्भर करता है।


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