द देवरिया न्यूज़,लोकसभा : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने संसद में जाति जनगणना से जुड़े अपने सवालों पर मिले लिखित जवाब का हवाला देते हुए मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया और इस मुद्दे को सीधे तौर पर बहुजन समाज के साथ विश्वासघात करार दिया।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर संसद से मिले लिखित जवाब की प्रति साझा करते हुए लिखा—
“संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर सवाल पूछा—उनका जवाब चौंकाने वाला है। न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा और न ही जनता से संवाद। राज्यों में हुई सफल जाति जनगणनाओं से सीखने की भी इच्छा नहीं। मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ खुला विश्वासघात है।”
राहुल गांधी ने गृह मंत्री से पूछे थे तीन सवाल
राहुल गांधी द्वारा साझा पत्र में उन्होंने सरकार से ये प्रश्न पूछे—
(क) दशकीय जनगणना की तैयारी के प्रमुख कदम और समयसीमा क्या है?
(ख) क्या सरकार जनगणना प्रश्नावली का प्रारूप सार्वजनिक करेगी और इस पर जनता व जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेगी?
(ग) क्या सरकार राज्यों में हुए जाति सर्वेक्षणों के अनुभवों पर विचार कर रही है? यदि हां, तो क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
सरकार ने क्या जवाब दिया?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में बताया—
(क)
जनगणना 2027 में दो चरणों में होगी:
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग): अप्रैल–सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों में
दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027 में (संदर्भ तिथि—1 मार्च 2027)
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमालयी राज्यों के बर्फीले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में होगी।
(ख)
प्रश्नावली को अंतिम रूप देने से पहले मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और डेटा उपयोगकर्ताओं से सुझाव लिए जाते हैं। प्रारूपित प्रश्नावली का फील्ड में पूर्व–परीक्षण किया जाता है और फिर इसे राजपत्र में अधिसूचित किया जाता है।
(ग)
जनगणना का 150 साल से अधिक पुराना इतिहास है। अगली जनगणना के लिए पूर्व जनगणनाओं और संबंधित हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखा जा रहा है।
देश में जनगणना कैसे होगी?
अगले वर्ष अप्रैल से शुरू होने वाले पहले चरण में मकानों और उनमें रहने वालों की जीवन व्यवस्था का विवरण जुटाया जाएगा। देश में (लद्दाख और पश्चिम बंगाल को छोड़कर) मकान सूचीकरण का पूर्वाभ्यास जारी है और प्रगणकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पहली बार डिजिटल माध्यम (मोबाइल ऐप व पोर्टल) का उपयोग होने से जनगणना के आंकड़े पहले की तुलना में जल्दी उपलब्ध होंगे।
2027 में होगी जातिगत जनगणना
आजादी के बाद पहली बार होने वाली जातिगत जनगणना को अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसके लिए अलग से प्रश्न तैयार किए जाएंगे और राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं।
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