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रतन टाटा के करीबी प्रमित झावेरी टाटा ट्रस्ट्स से होंगे अलग, ट्रस्टी पद से हटने का फैसला

Published on: February 1, 2026
Pramit Jhaveri, close to Ratan Tata

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के एक और करीबी सहयोगी अब टाटा ट्रस्ट्स से किनारा करने जा रहे हैं। प्रमित झावेरी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड से ट्रस्टी के पद से हटने का फैसला कर चुके हैं। उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को पत्र लिखकर साफ किया है कि 11 फरवरी 2026 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे ट्रस्टी के रूप में दोबारा नियुक्त नहीं होना चाहते।

31 जनवरी को लिखी गई इस चिट्ठी में प्रमित झावेरी ने बताया कि वे 12 फरवरी 2020 से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें यह अहम भूमिका स्वयं दिवंगत रतन टाटा ने सौंपी थी। झावेरी ने पत्र में उल्लेख किया कि इस फैसले को लेकर वे पहले ही नोएल टाटा से चर्चा कर चुके हैं और अब इसे औपचारिक रूप दे रहे हैं।

अपने पत्र में प्रमित झावेरी ने टाटा ट्रस्ट्स के साथ अपने कार्यकाल को सम्मान और गर्व से भरा बताया। उन्होंने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ना उनके लिए सौभाग्य की बात रही है। साथ ही उन्होंने ट्रस्ट्स और उसके नेतृत्व को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। इस पत्र की प्रतिलिपि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टियों और टाटा ट्रस्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिद्धार्थ शर्मा को भी भेजी गई है।

फरवरी 2020 में बने थे ट्रस्टी

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, टाटा समूह के प्रमुख परोपकारी ट्रस्टों में से एक है और टाटा संस में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। टाटा संस, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है, जिसके जरिए पूरे समूह का संचालन होता है। प्रमित झावेरी को फरवरी 2020 में टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में शामिल किया गया था। उस समय रतन टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन थे।

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में इन ट्रस्टों के ट्रस्टी न सिर्फ परोपकारी गतिविधियों बल्कि पूरे टाटा समूह की दिशा और नीति में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रमित झावेरी के इस फैसले को टाटा ट्रस्ट्स के नेतृत्व ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। रतन टाटा के निधन के बाद टाटा समूह और उससे जुड़े ट्रस्टों में धीरे-धीरे बदलाव हो रहे हैं और झावेरी का अलग होना उसी क्रम की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

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