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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर सियासत गरमाई, शहजाद पूनावाला का कांग्रेस पर बायकॉट का आरोप

Published on: January 12, 2026
Politics on Somnath Swabhiman festival
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। देशभर में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर इस आयोजन से दूरी बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहा है, तब कांग्रेस का इससे अलग रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।

रविवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पिछले 70–75 वर्षों से सोमनाथ मंदिर को लेकर एक ही तरह का रवैया अपनाती आ रही है। उनका आरोप है कि जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विचार सामने आया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे रोकने की कोशिश की थी। पूनावाला के मुताबिक, यहीं से कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति की नींव पड़ी।

उन्होंने आगे कहा कि जब सोमनाथ ट्रस्ट नदियों से जल लाने की योजना बना रहा था, तब भी नेहरू ने इसे रोकने का प्रयास किया। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि नेहरू को इस बात की चिंता थी कि पाकिस्तान में उनकी क्या छवि बनेगी। पूनावाला ने कहा कि यही रवैया कांग्रेस ने अयोध्या के मुद्दे पर भी अपनाया और राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए। उन्होंने इसे कांग्रेस की वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बताया।

बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस बार-बार हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध का रुख अपनाती रही है और यही वजह है कि आज वह सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे आयोजनों से भी दूरी बनाए हुए है।

गौरतलब है कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ उन अनगिनत लोगों की स्मृति में मनाया जा रहा है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जा रहा है। इतिहास के अनुसार, 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था, और उसी दौरान बलिदान देने वालों की याद में यह पर्व आयोजित किया जाता है।

पीआईबी के एक बयान में कहा गया है कि सदियों तक कई बार नष्ट करने की कोशिशों के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी विश्वास, साहस और राष्ट्रीय गर्व का सशक्त प्रतीक बना हुआ है। यह मंदिर अपनी प्राचीन महिमा में लौट सका, तो उसके पीछे देशवासियों का सामूहिक संकल्प और प्रयास ही कारण रहा है।

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