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उस्मान हादी हत्याकांड: वीडियो संदेश में फैसल करीम मसूद का इनकार, जमात-ए-इस्लामी पर जताया शक

Published on: January 1, 2026
Osman Hadi murder case
द देवरिया न्यूज़,ढाका : बांग्लादेश को झकझोर देने वाले उस्मान हादी हत्याकांड में नाम आने के बाद पहली बार मुख्य आरोपियों में शामिल बताए जा रहे फैसल करीम मसूद सामने आए हैं। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में फैसल ने हत्या में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। उसने दावा किया है कि वह इस समय दुबई में है और उस्मान हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई छात्र शिबिर से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है।
अपने बयान में फैसल करीम मसूद ने यह स्वीकार किया कि उसके उस्मान हादी से संबंध थे, लेकिन उसने इन्हें पूरी तरह कारोबारी करार दिया। फैसल के मुताबिक, वह एक आईटी कंपनी चलाता है और प्रमोशनल व व्यापारिक कारणों से उसकी हादी से मुलाकात होती थी।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में शेख हसीना विरोधी छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका में गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां करीब एक सप्ताह बाद 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद बांग्लादेश में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। कई मीडिया संस्थानों के दफ्तरों में आगजनी हुई, भारतीय मिशन पर पथराव किया गया और हालात बिगड़ने के चलते भारतीय वीजा सेंटर को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।

जमात पर जताया शक

वीडियो बयान में फैसल ने कहा कि उसने हादी को कुछ रकम जरूर दी थी, लेकिन यह किसी आपराधिक गतिविधि के लिए नहीं थी। उसने दावा किया कि यह रकम सरकारी ठेकों से जुड़े वादों के बदले में दी गई थी। फैसल ने कहा, “मैंने उस्मान हादी को नहीं मारा। मुझे और मेरे परिवार को झूठे तरीके से फंसाया जा रहा है। बदले की भावना से बचने के लिए मैं दुबई चला गया। हादी जमात से जुड़ा हुआ था और हत्या के पीछे जमाती तत्व हो सकते हैं।”
उसने आगे कहा कि उसने हादी को राजनीतिक चंदे के तौर पर पैसे दिए थे और बदले में सरकारी ठेका दिलाने का आश्वासन मिला था।

भारत भागने के दावे पर विवाद

इससे पहले बांग्लादेश पुलिस ने दावा किया था कि फैसल करीम मसूद और एक अन्य संदिग्ध आलमगीर शेख वारदात के बाद भारत भाग गए हैं। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एसएन नजरुल इस्लाम ने कहा था कि दोनों संदिग्ध हालुआघाट सीमा पार कर भारत में दाखिल हुए और कथित तौर पर दो भारतीय नागरिकों की मदद से मेघालय पहुंचे।
हालांकि, भारत की ओर से इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया गया था। मेघालय में बीएसएफ के आईजी जनरल ओपी उपाध्याय ने स्पष्ट किया था कि हालुआघाट सेक्टर से किसी के अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का कोई सबूत नहीं है। बीएसएफ के मुताबिक, न तो ऐसी कोई घटना देखी गई है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक रिपोर्ट मिली है।

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