द देवरिया न्यूज़ : जिले में मंगलवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर जनपद के विभिन्न मंदिरों और संस्थानों में भक्ति, ज्ञान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम देवरिया के रामजानकी मंदिर परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति, नैतिकता और समानता के प्रतीक थे। उन्होंने ‘रामायण’ जैसी अद्भुत रचना के माध्यम से समाज को धर्म, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
डीएम ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी हजारों वर्ष पहले थीं। उन्होंने समाज में समरसता, समानता और न्याय की भावना को जीवन का आधार माना। वर्तमान समय में जब सामाजिक और नैतिक मूल्य कमजोर पड़ रहे हैं, ऐसे में वाल्मीकि के विचार मानवता को नई दिशा दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद के विभिन्न मंदिरों और धर्मस्थलों में दीपदान, दीप प्रज्ज्वलन और वाल्मीकि रामायण पाठ के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर 8 घंटे, 12 घंटे और 24 घंटे का अखंड रामायण पाठ भी चल रहा है, जिसका उद्देश्य आम जनता को महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और उनके ग्रंथ में निहित मानवता, सामाजिक एकता और राष्ट्रीयता के मूल्यों से जोड़ना है।
जिलाधिकारी ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रणाली की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि केवल एक कवि या संत नहीं, बल्कि सामाजिक सुधारक भी थे, जिन्होंने वंचित और पिछड़े वर्गों को सम्मान दिलाने की राह दिखाई। समाज के सभी वर्गों को उनके आदर्शों को आत्मसात कर समानता पर आधारित समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद नागरिकों, धर्माचार्यों और छात्र-छात्राओं ने भी महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में कहा कि वाल्मीकि जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह अवसर है कि हम अपने समाज में नैतिकता, सत्य और समानता के मूल्यों को फिर से स्थापित करें। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समाज में सद्भाव और एकता के वातावरण को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
पूरे जनपद में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल रहा। मंदिरों में भजन-कीर्तन, सत्संग और रामायण पाठ से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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