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अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह पर सीबीआई का शिकंजा, 4 चीनी नागरिकों समेत 17 पर चार्जशीट, 1,000 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप

Published on: December 15, 2025
On international cyber fraud gang
द देवरिया न्यूज़,देश : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इनमें चार चीनी नागरिक शामिल हैं। इसके साथ ही 58 कंपनियों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के अनुसार, यह गिरोह शेल कंपनियों के जरिए ऑनलाइन ठगी कर अब तक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर चुका है।
यह साइबर फ्रॉड नेटवर्क अक्तूबर में उजागर हुआ था। जांच में सामने आया कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह था, जो अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगता था। इसमें फर्जी लोन ऑफर, नकली निवेश योजनाएं, पोंजी और मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम, पार्ट-टाइम जॉब का झांसा और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए ठगी शामिल थी।
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, गिरोह ने अवैध रूप से कमाई गई रकम को 111 शेल कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग खातों में घुमाया। म्यूल खातों के जरिए करीब 1,000 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, जिसमें से एक ही खाते में कुछ ही समय में 152 करोड़ रुपये जमा हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि शेल कंपनियां फर्जी निदेशकों, झूठे दस्तावेज, नकली पते और गलत कारोबारी विवरण के आधार पर बनाई गई थीं।
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल बैंक खातों और यूपीआई, फोन-पे जैसे पेमेंट गेटवे अकाउंट खोलने के लिए किया गया। इसके जरिए अपराध से अर्जित धन को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि पैसे के असली स्रोत को छिपाया जा सके।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह धोखाधड़ी 2020 में कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुई थी। शेल कंपनियों का नेटवर्क चार चीनी हैंडलर्स — जोउ यी, हुआन लिउ, वेइजियान लिउ और गुआनहुआ — के निर्देश पर खड़ा किया गया था। इनके भारतीय सहयोगियों ने अवैध रूप से लोगों के पहचान दस्तावेज जुटाए, जिनका इस्तेमाल शेल कंपनियां बनाने, म्यूल अकाउंट खोलने और ठगी की रकम को सफेद करने में किया गया।
सीबीआई ने यह भी खुलासा किया कि विदेशी नागरिक अब भी इस नेटवर्क को नियंत्रित कर रहे हैं। दो भारतीय आरोपियों के बैंक खातों से जुड़ी यूपीआई आईडी अगस्त 2025 तक विदेश से सक्रिय पाई गईं, जिससे विदेशी नियंत्रण और रियल-टाइम ऑपरेशन की पुष्टि हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि रैकेट में तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। गूगल विज्ञापन, बल्क एसएमएस, सिम-बॉक्स, क्लाउड सिस्टम, फिनटेक प्लेटफॉर्म और बड़ी संख्या में म्यूल खातों के जरिए ठगी को अंजाम दिया गया। पूरी प्रक्रिया इस तरह डिजाइन की गई थी कि पीड़ितों की पहचान और पैसों की ट्रेल छिपी रहे और कानून एजेंसियों को भनक न लगे।
यह जांच भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली जानकारी के आधार पर शुरू हुई थी, जहां ऑनलाइन निवेश और नौकरी के नाम पर ठगी की कई शिकायतें मिली थीं। अक्तूबर में इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सीबीआई ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए, जिनकी फोरेंसिक जांच की गई।

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