द देवरिया न्यूज़,मस्कट: ओमान ने भारत को 20 से अधिक जगुआर लड़ाकू विमान गिफ्ट करने का ऐलान किया है। ये विमान भारतीय वायुसेना (IAF) को सौंपे जाएंगे। लंबे समय से ओमानी वायुसेना में इस्तेमाल हो रहे ये विमान फिलहाल ऑपरेशनल नहीं हैं, लेकिन भारत में इन्हें फिर से उपयोग में लाने की तैयारी है। भारतीय वायुसेना के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है, और भारत ने इन विमानों को स्वीकार करने की सहमति दे दी है।
स्पेयर पार्ट्स के संकट से मिलेगा बड़ा राहत
ओमान से मिलने वाले जगुआर विमानों का मुख्य उपयोग भारतीय वायुसेना के मौजूदा जगुआर बेड़े के लिए स्पेयर पार्ट्स के स्रोत के रूप में किया जाएगा। भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो आज भी एंग्लो-फ्रेंच मूल के जगुआर लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रहा है। कई दशक पहले इन विमानों का उत्पादन बंद हो चुका है, जिसके चलते जरूरी पुर्जों की भारी कमी बनी हुई है।
भारत–ओमान की पुरानी रक्षा साझेदारी
भारत और ओमान के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। इन्हीं रिश्तों के तहत ओमान यह कदम उठा रहा है। इन विमानों को तोड़कर उपयोगी कलपुर्जे निकाले जाएंगे, जिससे भारतीय वायुसेना के विमानों की ऑपरेशनल उपलब्धता बनी रह सकेगी।
भारत में जगुआर का लंबा इतिहास
भारत को पहला जगुआर लड़ाकू विमान 1979 में मिला था। यह एक डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट है, जिसने कई अहम सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। 1999 के कारगिल युद्ध समेत पाकिस्तान के खिलाफ कई ऑपरेशनों में इसका इस्तेमाल हो चुका है।
समय-समय पर भारतीय वायुसेना ने जगुआर विमानों को अपग्रेड और ओवरहॉल किया है, लेकिन प्रॉडक्शन बंद होने के कारण स्पेयर पार्ट्स की किल्लत लगातार बनी हुई है। ओमान से मिलने वाले ये विमान इस कमी को काफी हद तक दूर करने में मदद करेंगे।
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