द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारत और लीग ऑफ अरब स्टेट्स (LAS) के बीच एक अहम रणनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। दूसरी इंडिया–अरब फॉरेन मिनिस्टर्स मीटिंग के बाद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस घोषणापत्र के जरिए 22 अरब देशों ने भारत के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर मुहर लगा दी है। यह भारत की कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अरब देशों ने एकसुर में आतंकवाद के हर रूप की निंदा की है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सह-अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद 31 जनवरी 2026 को जारी घोषणापत्र में कहा गया है कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसमें सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग, ड्रोन और आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग, हथियारों व ड्रग्स की तस्करी जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई गई है। UNSC की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध आतंकियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
इस घोषणापत्र का भारत के लिए एक और अहम पहलू संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर है। 22 अरब देशों ने एकसुर से कहा कि मौजूदा UNSC ढांचा पुराना हो चुका है और यह आज की वैश्विक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता। घोषणापत्र में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सदस्यता के विस्तार की मांग की गई है। भारत लंबे समय से UNSC की स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और अरब देशों का यह समर्थन भारत की दावेदारी को और मजबूत करता है।
डिफेंस और विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने बेहद सधे और चतुर कूटनीतिक कदमों के जरिए अरब देशों को आतंकवाद के मुद्दे पर अपने साथ खड़ा किया है। लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जे.एस. सोढ़ी के अनुसार, 22 मुस्लिम देशों को आतंकवाद पर एक मंच पर लाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, जिसका संदेश परोक्ष रूप से पाकिस्तान तक भी जाता है।
बैठक के दौरान अरब देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी एकजुट होकर निंदा की। इसके साथ ही मध्य पूर्व में स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन राज्य की मांग का समर्थन किया गया। गाजा में युद्धविराम के लिए शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन के नतीजों का स्वागत किया गया और मिस्र, कतर, अमेरिका व अल्जीरिया की भूमिका की सराहना की गई।
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत और अरब देशों के रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति बनी। फिलहाल दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 240 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का है। घोषणापत्र में स्टार्टअप सहयोग, स्पेस कोऑपरेशन और नई आर्थिक पहलों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। 2027 में पहला भारत–अरब स्टार्टअप कॉन्क्लेव और स्पेस कोऑपरेशन वर्किंग ग्रुप की बैठक प्रस्तावित है, जबकि 2028 में तीसरी मंत्रिस्तरीय बैठक होगी।
इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में भी बेचैनी देखी जा रही है। पाकिस्तानी विश्लेषकों ने अपनी सरकार को चेताया है कि अगर अरब देशों के साथ रिश्तों को मजबूत नहीं किया गया, तो क्षेत्र में भारत की अहमियत और बढ़ती जाएगी। कुल मिलाकर, नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की कूटनीति, आतंकवाद विरोधी नीति और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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