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लोकपाल से निशिकांत दुबे को बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति की शिकायत खारिज

Published on: January 15, 2026
Lokpal to Nishikant Dubey
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : लोकपाल ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर दाखिल की गई शिकायतों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। 13 जनवरी 2026 को जारी अपने 134 पन्नों के विस्तृत आदेश में लोकपाल ने एक्टिविस्ट अमिताभ ठाकुर द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए झारखंड के गोड्डा सांसद को बड़ी राहत दी है। साथ ही लोकपाल ने दुबे को शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी छूट दे दी है।

लोकपाल की जस्टिस ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह शिकायतें न सिर्फ तथ्यहीन हैं, बल्कि ओछी और कष्ट पहुंचाने वाली प्रकृति की हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि आरोपों का मुख्य उद्देश्य स्वयं सांसद के बजाय उनकी पत्नी को निशाना बनाना प्रतीत होता है, जबकि लोकपाल का अधिकार क्षेत्र लोक सेवक के रूप में सांसद तक सीमित है।

शिकायतकर्ता अमिताभ ठाकुर ने 2009 से 2024 तक दाखिल किए गए चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए सांसद की पत्नी की संपत्ति में कथित असामान्य वृद्धि का दावा किया था। हालांकि लोकपाल ने जांच में पाया कि निशिकांत दुबे की व्यक्तिगत संपत्तियों में केवल मामूली बदलाव हुआ है और आय से अधिक संपत्ति का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।

लोकपाल ने यह भी कहा कि सार्वजनिक डोमेन में मौजूद अपुष्ट जानकारियों के आधार पर शिकायत दर्ज करना गंभीर लापरवाही है। आदेश में स्पष्ट किया गया कि यह शिकायत राजनीतिक या निजी दुर्भावना से प्रेरित लगती है और सोशल मीडिया पर इसे सार्वजनिक कर गोपनीयता का भी उल्लंघन किया गया।

लोकपाल ने निशिकांत दुबे को यह स्वतंत्रता दी है कि वे अपनी निजता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप में अमिताभ ठाकुर के खिलाफ कानूनी कदम उठा सकते हैं। हालांकि, लोकपाल नियमों के उल्लंघन से जुड़ा कारण बताओ नोटिस पहले ही खारिज किया जा चुका है। आदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि लोक सेवकों की ईमानदारी की रक्षा करना लोकपाल की जिम्मेदारी है और संस्था पर पक्षपात के आरोपों को भी अस्वीकार किया गया।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उनके और उनके परिवार पर लगाए गए झूठे आरोपों पर लोकपाल का फैसला सच्चाई की जीत है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका या लोकसभा के माध्यम से ऐसे आरोप लगाने वालों के खिलाफ उत्पीड़न का मुकदमा दायर करने की सलाह दी गई है और वे इस पर गंभीरता से विचार करेंगे।

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