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लेह हिंसा: चार मौतों के मामले की न्यायिक जांच के आदेश, उपमंडल मजिस्ट्रेट करेंगे जांच

Published on: October 3, 2025
Leh violence four deaths
द देवरिया न्यूज़ : लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा के मामले में न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। अब प्रशासन ने साफ किया है कि पूरी जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाएगी।
नुब्रा उपमंडल मजिस्ट्रेट को मिली जिम्मेदारी
लेह के उपायुक्त ने आदेश जारी कर नुब्रा उपमंडल मजिस्ट्रेट मुकुल बेनीवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच प्रक्रिया को लेकर उन्होंने जनता से सहयोग की अपील की है। मुकुल बेनीवाल ने कहा कि यदि किसी के पास घटना से जुड़ी कोई जानकारी, सबूत या गवाही है तो वे 4 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक कार्यदिवसों में उपायुक्त कार्यालय, लेह के कॉन्फ्रेंस हॉल में उनसे मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय लोग आगे आकर अपनी जानकारी साझा करें।
कर्फ्यू में ढील, लेकिन इंटरनेट बंद
घटना के बाद से लेह में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। बुधवार को प्रशासन ने कर्फ्यू में आठ घंटे की ढील दी। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बाजार खुले और सड़कों पर लोगों की आवाजाही देखी गई। हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से स्कूल और कॉलेज बंद रखे गए। वहीं इंटरनेट सेवाएं फिलहाल कल तक के लिए निलंबित हैं।
लद्दाखी छात्रों ने उठाई मांग
देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय लद्दाखी छात्र संगठनों ने गृह मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर इस हिंसा की न्यायिक जांच की औपचारिक मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी रखी है।
आंदोलन से हिंसा तक
गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन लंबे समय से चल रहा था। यह आंदोलन 24 सितंबर को अचानक हिंसक हो गया।
इस दौरान हुई झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने गुस्से में भाजपा कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। हालात काबू से बाहर होते देख प्रशासन को अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा।
सोनम वांगचुक पर आरोप
सरकार ने इस हिंसा की जिम्मेदारी प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर डाली है। प्रशासन का आरोप है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी। इसके बाद अगले ही दिन सरकार ने वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भी इस हिंसा को सुनियोजित बताया और कहा कि प्रशासन कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है।

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