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ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर भारत की सतर्क रणनीति, अरब देशों से चर्चा के बाद होगा फैसला

Published on: January 24, 2026
India on Trump's 'Board of Peace'

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : नई दिल्ली में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की प्रस्तावित बैठक से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने गाजा शांति प्रस्ताव ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि भारत ने इस निमंत्रण पर अब तक कोई आधिकारिक सहमति या असहमति नहीं जताई है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत 31 जनवरी को दिल्ली में होने वाली बैठक के दौरान अरब देशों की राय जानने के बाद ही इस पर कोई ठोस रुख अपनाएगा।

भारत की सतर्कता की एक बड़ी वजह यह है कि कई प्रमुख अरब देशों ने पहले ही ट्रंप के नेतृत्व वाले इस बोर्ड में शामिल होने का फैसला कर लिया है। ऐसे में भारत किसी भी निर्णय से पहले क्षेत्रीय समीकरणों को समझना चाहता है। संकेत मिल रहे हैं कि भारत इस मुद्दे पर सिर्फ इस बैठक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे की रणनीति भी तैयार कर रहा है।

अरब देशों की राय जानने की तैयारी

इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब, मोरक्को, मिस्र, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने पर सहमति जता दी है। भारत इन देशों से विचार-विमर्श के बाद ही अपना फैसला लेना चाहता है। खासतौर पर UAE भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है, जिसके साथ हाल ही में बड़े व्यापारिक और रक्षा समझौते हुए हैं। खाड़ी क्षेत्र में UAE की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

फरवरी में इजरायल और अरब देश की यात्रा संभव

इस बीच अटकलें यह भी हैं कि अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में इजरायल और किसी अरब देश की यात्रा कर सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी को इजरायल आने का निमंत्रण दिया है, हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यदि यह यात्रा होती है तो ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव इन बैठकों का अहम मुद्दा हो सकता है।

दावोस में दिखी बोर्ड ऑफ पीस की झलक

गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर हस्ताक्षर के लिए वैश्विक नेताओं की बैठक बुलाई थी। इसमें तुर्की, कतर, पाकिस्तान, अर्जेंटीना, हंगरी, बुल्गारिया, बहरीन, कजाकिस्तान, कोसोवो, आर्मेनिया, अजरबैजान, मोरक्को और पराग्वे जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी अपने फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ मौजूद रहे।

UN के समानांतर संगठन की आशंका

‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर भारत की चिंता सिर्फ गाजा संकट तक सीमित नहीं है। कूटनीतिक हलकों में यह आशंका भी जताई जा रही है कि ट्रंप इस पहल के जरिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के समानांतर एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच खड़ा करना चाहते हैं। हालांकि ट्रंप दावा कर रहे हैं कि यह बोर्ड UN के साथ मिलकर काम करेगा, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर असमंजस बना हुआ है।

इसके अलावा, शांति की बात करने के साथ-साथ ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर दिए गए आक्रामक संकेत भी भारत की चिंता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारत किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लेने के मूड में है।


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