भारत के डिजिटल नेटवर्क की गूंज विश्व में
सिंधिया ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने एक अभूतपूर्व नेटवर्क तैयार किया है, जो तकनीक के माध्यम से देश के सबसे सुदूर इलाकों को जोड़ रहा है। भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि डिजिटल उत्पादों और सेवाओं का निर्माता बन चुका है।”
उन्होंने बताया कि आज भारतीय उद्यमी और नवप्रवर्तक अपने दम पर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। “हमारे पास अब खुद के सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन और वैश्विक टेक इनोवेशन में भागीदारी की क्षमता है, जो कुछ वर्ष पहले तक अकल्पनीय थी,” उन्होंने कहा।
डिजिटल परिवर्तन का सफर: मोबाइल से सेमीकंडक्टर तक
सिंधिया ने याद दिलाया कि भारत का डिजिटल सफर दो दशक पहले मोबाइल क्रांति से शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक देश ने इंटरनेट क्रांति, डिजिटल पेमेंट, 5G तकनीक और अब सेमीकंडक्टर निर्माण तक की लंबी यात्रा तय की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान ने ग्रामीण भारत को शहरी भारत से जोड़ा है और देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को नई ऊर्जा दी है।
सैटकॉम सम्मेलन: ‘आकाश से धरती तक बदलाव की क्रांति’
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 के तहत आयोजित ‘सार्वभौमिक कनेक्टिविटी के लिए अंतरिक्ष नेटवर्क’ सत्र का उद्घाटन करते हुए सिंधिया ने कहा कि यह सम्मेलन “एक नई क्रांति की शुरुआत” है।
“यह क्रांति आकाश में जन्मी है, उपग्रहों के जरिये संचालित है, लेकिन इसका असली लक्ष्य धरती पर रहने वाले लोगों के जीवन को बदलना है,” उन्होंने कहा।
उपग्रह संचार से सुदूर गांवों तक पहुंचेगा इंटरनेट
मंत्री ने कहा कि सैटकॉम (Satellite Communication) अब विलासिता नहीं, बल्कि डिजिटल युग में ‘न्याय का अधिकार’ बन चुका है।
उन्होंने कहा, “यह तकनीक उन किसानों, मछुआरों, डॉक्टरों और छात्रों को जोड़ने जा रही है, जो अब तक स्थलीय नेटवर्क से दूर थे। सैटकॉम के जरिए हर व्यक्ति को डिजिटल भारत का लाभ मिलेगा।”
38 हजार गांवों को जोड़ने का मिशन जारी
सिंधिया ने बताया कि सरकार ने डिजिटल भारत निधि और सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) के माध्यम से 40,000 करोड़ रुपये के निवेश से देश के सबसे दुर्गम 38,260 गांवों को जोड़ने का मिशन शुरू किया है। इनमें से लगभग 29,000 गांव (करीब 75%) पहले ही डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में हर घर तक तेज, सस्ती और विश्वसनीय कनेक्टिविटी पहुंचाना है।
भारत: ‘डिजिटल वसुधैव कुटुंबकम्’ की दिशा में अग्रसर
मंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि भारत अब ‘डिजिटल वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा को साकार कर रहा है—जहां तकनीक का उपयोग केवल प्रगति के लिए नहीं, बल्कि समावेशी विकास के लिए किया जा रहा है।
“भारत का डिजिटल हाईवे केवल नेटवर्क नहीं, बल्कि 140 करोड़ लोगों के सपनों को जोड़ने वाली जीवनरेखा है,” सिंधिया ने कहा।