उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, कारीगर, अन्य हितधारकों के साथ-साथ इराक और रवांडा के राजदूत भी उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री मांझी और शोभा करंदलाजे ने प्रदर्शनी में लगे कई स्टॉलों का निरीक्षण किया और भारतीय अर्थव्यवस्था में कारीगरों व एमएसएमई सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
जीतन राम मांझी ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा हाट गांवों और कस्बों के कारीगरों को अपने हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को बेचने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करता है। उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना देश के हर विश्वकर्मा को बाजार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को तीन लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला ऋण, डिजिटल लेनदेन को अपनाने पर प्रोत्साहन, साथ ही ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स से जुड़ी मार्केटिंग सहायता दी जा रही है।
केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 117 से अधिक कारीगरों की भागीदारी देखना बेहद उत्साहजनक है। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाट में 18 से 31 जनवरी तक आयोजित यह आयोजन भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा का भव्य उत्सव है, जो प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रात 10 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा।
एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एससीएल दास ने पीएम विश्वकर्मा को ‘विरासत से विकास’ के विजन को साकार करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं, अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने कहा कि विश्वकर्मा भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन हैं और यह योजना उन्हें बेहतर बाजार अवसर प्रदान कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान बिहार और राजस्थान की थीम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोक नृत्य भी हुए, जिससे आयोजन में रंग और जीवंतता देखने को मिली।