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रामपुर कारखाना क्षेत्र में बिजली संकट से हाहाकार, उपभोक्ता सड़क से सोशल मीडिया तक कर रहे विरोध

Published on: September 25, 2025
In Rampur factory area

द देवरिया न्यूज़ ,रामपुर कारखाना। उमस और प्रचंड गर्मी के मौसम में बिजली की कटौती और लगातार ट्रिपिंग ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि रात को घरों के अंदर रहना लोगों के लिए असंभव हो गया है। बिजली आपूर्ति रुकते ही पंखे और कूलर ठप हो जाते हैं, जिससे परेशान उपभोक्ता घर छोड़कर सड़कों पर टहलने को मजबूर हो जाते हैं। ग्रामीण और शहरी उपभोक्ता लगातार सोशल मीडिया पर बिजली निगम के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। फेसबुक और व्हाट्सऐप ग्रुपों पर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब बिजली बिल समय से लिया जाता है तो बदले में राहत क्यों नहीं दी जाती।

एक ही लाइन पर दो उपकेंद्र, 25 हजार उपभोक्ता बेहाल

रामपुर कारखाना क्षेत्र के पांडेय चक और देसही देवरिया के इमलिया उपकेंद्रों को कसया ट्रांसमिशन से बिजली आपूर्ति की जाती है। तकनीकी दृष्टि से यह व्यवस्था कमजोर और अव्यवहारिक है, क्योंकि एक ही लाइन से दो उपकेंद्रों को बिजली सप्लाई दी जा रही है। इसका सीधा असर करीब 25 हजार उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। जैसे ही लोड बढ़ता है, पूरी सप्लाई लड़खड़ा जाती है।

गर्मी के मौसम में बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है, लेकिन ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था उस दबाव को झेलने में असमर्थ है। नतीजतन बार-बार ट्रिपिंग और लाइट कटौती का सामना उपभोक्ताओं को करना पड़ता है।

दिन में किसी तरह, रात को हाहाकार

उपभोक्ता दिन के समय तो किसी तरह हालात झेल ले रहे हैं, लेकिन रात में समस्या विकराल रूप ले लेती है। उमस और गर्मी के कारण नींद हराम हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में लोग छतों और आंगनों में सोने को मजबूर हैं, वहीं कस्बाई इलाके के लोग सड़कों और गलियों में चहलकदमी कर रहे हैं।

रुस्तमपुर फीडर की स्थिति तो सबसे खराब बताई जा रही है। यहां हर पांच मिनट बाद बिजली चली जाती है और आधे घंटे बाद लौटती है। इस तरह का सिलसिला पूरी रात चलता रहता है। बार-बार कटौती से न केवल उपभोक्ता बेहाल हैं बल्कि उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी खराब हो रहे हैं।

बिजली उपकरणों पर भारी संकट

लगातार ट्रिपिंग और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण उपभोक्ताओं के पंखे, टीवी, फ्रिज और इन्वर्टर जैसे उपकरण जल रहे हैं। मरम्मत का खर्च उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। जिन परिवारों के पास छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं, उनके लिए हालात और ज्यादा दिक्कत भरे हैं।

विभागीय कर्मचारी ओवरलोड का बहाना

इस पूरे संकट को लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। लेकिन विभागीय कर्मचारी और अधिकारी ओवरलोड का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। उनका कहना है कि ट्रांसमिशन लाइन पर क्षमता से ज्यादा दबाव पड़ रहा है, इसलिए कटौती और ट्रिपिंग को रोकना मुश्किल हो रहा है। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ बहाना है। अगर समय से व्यवस्था सुधारी जाती और वैकल्पिक लाइन या अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाए जाते, तो हालात इतने खराब न होते।

सोशल मीडिया पर उठ रही मांग

ग्रामीण और कस्बाई लोग अब आंदोलन की तैयारी में हैं। सोशल मीडिया पर उपभोक्ताओं ने लिखा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से धरना-प्रदर्शन करेंगे। कई लोगों ने चेतावनी दी है कि वे बिजली बिल का भुगतान रोक देंगे।

रामपुर कारखाना और आसपास के इलाकों में बिजली संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। एक ओर उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, वहीं दूसरी ओर लापरवाह बिजली आपूर्ति प्रणाली लोगों की नींद और जीवन दोनों हराम कर रही है। उपभोक्ता अब केवल शिकायत ही नहीं कर रहे, बल्कि विरोध और आंदोलन की दिशा में भी बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए तो यह असंतोष बड़ा जनाक्रोश बन सकता है।


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