द देवरिया न्यूज़,तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है। ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका को देखते हुए अमेरिका ने खुद को ईरानी मिसाइल हमलों से बचाने के लिए क्षेत्र में अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। इनमें THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) बैटरी और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो वह इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा। इसी आशंका के चलते अमेरिका ने कुवैत, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी रक्षा एजेंसियां क्षेत्र में सुरक्षा स्तर को तेजी से बढ़ा रही हैं।
कहां तैनात किए गए एयर डिफेंस सिस्टम
हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया है कि THAAD और पैट्रियट सिस्टम को किन-किन स्थानों पर तैनात किया गया है, लेकिन सैन्य सूत्रों के अनुसार इनकी तैनाती न सिर्फ इजरायल, बल्कि मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के आठ प्रमुख सैन्य अड्डों पर की गई है। ये अड्डे बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, जॉर्डन, तुर्की और इराक में स्थित हैं।
इन ठिकानों को छोटी दूरी के अन्य एयर डिफेंस सिस्टम से भी लैस किया गया है, ताकि ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव किया जा सके। जनवरी 2026 तक मध्य पूर्व में अमेरिका के करीब 30,000 से 40,000 सैनिक तैनात बताए जा रहे हैं, जो क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को दर्शाता है।
मध्य पूर्व तनाव का भारत पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार इस क्षेत्र से गहराई से जुड़े हुए हैं। जनवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरतों का लगभग 53.89 प्रतिशत मध्य पूर्वी देशों से आयात करता है।
तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
व्यापार, महंगाई और बाजार पर असर
हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण पहले ही वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई है। भारतीय निर्यातकों के लिए समुद्री परिवहन लागत लगभग दोगुनी हो चुकी है, जिससे माल की आपूर्ति में देरी हो रही है। कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि से कृषि और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर शेयर बाजारों पर भी देखा जा सकता है। तनाव बढ़ने पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से निवेश निकाल सकते हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
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