Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

गणतंत्र दिवस परेड में गूंजा शौर्य का सम्मान ,19 और 23 की उम्र में इतिहास रचने वाले कारगिल के शेर

Published on: January 27, 2026
Gunja Shaurya echoes in the Republic Day Parade

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की भव्य परेड की शुरुआत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों से सम्मानित जांबाज सैनिकों के सम्मान के साथ हुई। परेड शुरू होते ही परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेता खुली जीप में परेड स्थल पर पहुंचे और राष्ट्रपति को सलामी दी। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बने हजारों दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ भारत मां के इन वीर सपूतों का अभिनंदन किया।

परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों में सूबेदार मेजर (ऑनरेरी कैप्टन) योगेन्द्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त), 18 ग्रेनेडियर्स और सूबेदार मेजर संजय कुमार, 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स शामिल थे। वहीं अशोक चक्र विजेताओं में मेजर जनरल सी. ए. पिठावाला (सेवानिवृत्त) और कर्नल डी. श्रीराम कुमार मौजूद रहे। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के नायकों योगेन्द्र सिंह यादव और संजय कुमार की अद्वितीय वीरता को विशेष रूप से याद किया गया।

16 साल की उम्र में सेना, 17 गोलियों के बाद भी दुश्मन पर भारी

सूबेदार मेजर (ऑनरेरी कैप्टन) योगेन्द्र सिंह यादव ने महज 16 साल 5 महीने की उम्र में भारतीय सेना ज्वाइन की थी। कारगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई 1999 को टाइगर हिल की दुर्गम चोटियों पर कब्जा करने के अभियान में वे 18 ग्रेनेडियर्स की घातक टीम का हिस्सा थे। दुश्मन की भीषण फायरिंग में उनके प्लाटून कमांडर शहीद हो गए, लेकिन गले और कंधे में गोलियां लगने के बावजूद योगेन्द्र सिंह यादव रस्सियों के सहारे 60 फीट ऊपर चढ़ गए।
शरीर में 17 गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने एक-एक कर दुश्मन के बंकरों को ध्वस्त किया और अपने साथियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिया। उनकी इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, जिससे वे यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के सैनिक बने।

संजय कुमार: अकेले दुश्मन के बंकर पर धावा

कारगिल युद्ध में ही सूबेदार मेजर संजय कुमार ने प्वाइंट-4875 पर दुश्मन से लोहा लिया। भारी गोलीबारी के कारण जब भारतीय सेना आगे नहीं बढ़ पा रही थी, तब उन्होंने अकेले ही दुश्मन के बंकर पर हमला कर दिया। दो गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और दुश्मन की मशीनगन से ही अन्य बंकरों को नष्ट कर दिया। उनके साहस से प्रेरित होकर पूरी टुकड़ी ने हमला तेज किया और रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। महज 23 साल की उम्र में संजय कुमार को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

परमवीर और अशोक चक्र का महत्व

परमवीर चक्र युद्ध के दौरान अदम्य साहस और असाधारण वीरता के लिए दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। वहीं अशोक चक्र युद्ध के अलावा अन्य परिस्थितियों में सर्वोच्च साहस और बलिदान के लिए प्रदान किया जाता है। गणतंत्र दिवस पर इन वीरों का सम्मान देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।


इसे भी पढ़ें : देवरिया पुलिस लाइन में गणतंत्र दिवस की भव्य परेड, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने ली सलामी

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply