द देवरिया न्यूज़ : उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते हुए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का विरोध किया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा और फैसले को शिक्षकों के हितों के खिलाफ बताया। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने एक सितंबर 2025 से उन शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है, जिनकी सेवा अवधि अभी पांच वर्ष से अधिक शेष है। आदेश के अनुसार, ऐसे शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए अगले दो वर्षों के भीतर टीईटी पास करना होगा।
शिक्षक संघ का कहना है कि यह निर्णय RTE एक्ट 2009 और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के 2010 के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। इन नियमों के तहत 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई थी।
संघ की जिला अध्यक्ष हेमा त्रिपाठी ने कहा कि यह फैसला ऐसे मामले में सुनाया गया, जिसमें सिर्फ महाराष्ट्र और तमिलनाडु सरकारें पक्षकार थीं। उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों को सुनवाई में शामिल नहीं किया गया। बावजूद इसके, सुप्रीम कोर्ट ने धारा 142 के तहत इसे पूरे देश में लागू कर दिया। उन्होंने बताया कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के करीब 2.5 लाख सेवारत शिक्षक प्रभावित होंगे।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि सभी शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुसार वैध रूप से हुई थी। अब सेवा के वर्षों बाद टीईटी को अनिवार्य करने से शिक्षक मानसिक तनाव में हैं और इसका असर शिक्षण व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह उच्चतम न्यायालय में शिक्षकों का पक्ष रखे और जरूरत पड़ने पर नियमों में संशोधन करे, ताकि सेवारत शिक्षकों को सेवा और पदोन्नति में टीईटी से छूट मिल सके।
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