द देवरिया न्यूज़ : नगर पालिका परिषद देवरिया में गुरुवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हो गया जब एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी की मौत के बाद परिजन और साथी कर्मचारी उसका शव लेकर परिसर पहुंच गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। मृतक के परिजनों ने आर्थिक सहायता और एक आश्रित को नौकरी दिए जाने की मांग को लेकर धरना दिया।
काम के दौरान हुआ था हादसा
मृतक की पहचान रामनक्षत्र चौरसिया (55 वर्ष), पुत्र रामा चौरसिया, निवासी पैकोली गांव, थाना सुरौली के रूप में हुई है। वे नगर पालिका के प्रकाश विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत थे। 6 अगस्त को बेलडाढ़ रोड पर कार्य करते समय वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और फिर लखनऊ रेफर कर दिया गया था।
लगभग एक माह तक चले इलाज के बावजूद बुधवार देर शाम लखनऊ में उनकी मौत हो गई। गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव को जब देवरिया लाया गया, तो परिवार और सहकर्मियों का आक्रोश फूट पड़ा।
शव लेकर पहुंचे नगर पालिका परिसर, धरना प्रदर्शन
शव को सीधे नगर पालिका परिषद परिसर लाया गया, जहां परिजनों और कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक के परिजनों का आरोप था कि हादसे के बाद इलाज और परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर कोई ठोस सहयोग नहीं मिला। उन्होंने मृतक की पत्नी को मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने की मांग रखी।
नगर पालिका अध्यक्ष ने दिया आश्वासन
स्थिति को बिगड़ते देख नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह मौके पर पहुंचीं और परिजनों को शांत करने का प्रयास किया। उन्होंने मृतक की पत्नी मुन्नी देवी को तत्काल ₹1 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की और आश्वासन दिया कि परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्सिंग के तहत नौकरी दी जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि कार्यदायी संस्था से बात कर मृतक परिवार को अतिरिक्त सहयोग दिलवाने का प्रयास किया जाएगा।
शांत हुआ प्रदर्शन, शव ले जाया गया अंतिम संस्कार के लिए
नगर पालिका अध्यक्ष के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद परिजन और कर्मचारी शांत हो गए। इसके बाद मृतक का शव अंतिम संस्कार के लिए गांव ले जाया गया। इस पूरी घटना के चलते नगर पालिका परिसर में घंटों तक गहमा-गहमी बनी रही।
स्थानीयों ने उठाए सुरक्षा और जिम्मेदारी के सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि हादसे के तुरंत बाद नगर पालिका या संबंधित एजेंसी की ओर से कोई स्पष्ट सहायता या मुआवजा योजना क्यों नहीं थी
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