द देवरिया न्यूज़,बीजिंग : पहलगाम हमले के बाद जब भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा था, तब चीन की PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर चर्चा तेज हुई थी। उस समय सामने आया था कि चीन ने पाकिस्तान को वही PL-15 मिसाइल दी थी, जो मूल रूप से पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) के लिए विकसित की गई थी, जिसकी रेंज 200 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। बाद में ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह भी स्पष्ट हुआ कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ PL-15 मिसाइल का इस्तेमाल किया था।
अब चीन की एक और उन्नत और रहस्यमय मिसाइल PL-17 को लेकर नई जानकारियां सामने आ रही हैं, जिसने सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।
PL-17: चीन की सबसे रहस्यमय एयर-टू-एयर मिसाइल
PL-17 को PLAAF का सबसे गोपनीय हथियार माना जाता है। यह भी एयर-टू-एयर मिसाइल है, लेकिन इसकी रेंज और क्षमता PL-15 से कहीं अधिक बताई जाती है। हालांकि यह मिसाइल कई वर्षों से मौजूद मानी जा रही है, लेकिन अब तक इसके बारे में कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हाल ही में PL-17 की एक नई तस्वीर सामने आई है, जिसे अब तक की सबसे स्पष्ट तस्वीर माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तस्वीर चीन में किसी ट्रेड शो या रक्षा प्रदर्शनी के दौरान ली गई हो सकती है, जहां मिसाइल का फुल-साइज़ मॉडल प्रदर्शित किया गया था। तस्वीर में मिसाइल के पीछे J-20 स्टील्थ फाइटर जेट से जुड़ा प्रचार बोर्ड भी दिखाई देता है।
पहली बार 10 साल पहले दिखी थी झलक
PL-17 की पहली धुंधली तस्वीर करीब एक दशक पहले सामने आई थी। उस समय इसके बड़े आकार—करीब 20 फीट लंबी मिसाइल—के कारण इसे बहुत लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल माना गया था। शुरुआती आकलन में कहा गया था कि इसे विशेष रूप से एयर टैंकर और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग (AEW) एयरक्राफ्ट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
संभावित क्षमता और तकनीक
रिपोर्ट्स के अनुसार, PL-17 में डुअल-पल्स रॉकेट मोटर हो सकती है। इसके कंट्रोल के लिए चार छोटे टेल फिन और थ्रस्ट-वेक्टरिंग नोजल का इस्तेमाल किया गया है।
मिसाइल की संभावित रेंज 250 मील (करीब 400 किलोमीटर) तक बताई जा रही है, जबकि इसकी अधिकतम गति मैक 4 के आसपास हो सकती है। हालांकि, ये आंकड़े ऑपरेशनल परिस्थितियों के आधार पर बदल सकते हैं।
एडवांस गाइडेंस सिस्टम
माना जाता है कि PL-17 में दो-तरफा डेटा लिंक और AESA (Active Electronically Scanned Array) सीकर का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स के प्रति अधिक सक्षम बनाता है। इसके अलावा, एक पैसिव एंटी-रेडिएशन सीकर के इस्तेमाल की भी संभावना जताई जा रही है।
किन विमानों से होगी तैनाती?
अब तक PL-17 को J-16 फाइटर जेट पर देखा गया है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि इसे J-20 स्टील्थ फाइटर में इंटीग्रेट किया जा सकता है। हालांकि, बाहरी हार्डपॉइंट पर मिसाइल लगाने से J-20 की स्टील्थ क्षमता प्रभावित हो सकती है।
मिसाइल के बड़े आकार के कारण इसे J-10C या J-35 स्टील्थ फाइटर में शामिल करना मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में इसके पाकिस्तान को निर्यात होने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है।
पाकिस्तान को मिलने की संभावना बेहद कम
विशेषज्ञों का मानना है कि PL-17 को चीन मुख्य रूप से अपनी वायुसेना के लिए ही सीमित रखेगा। संभावना है कि भविष्य में इसे चीन के संभावित छठी पीढ़ी के फाइटर जेट J-36 के साथ इंटीग्रेट किया जाए, ताकि इसकी अधिकतम रेंज और क्षमता का पूरा इस्तेमाल हो सके।
भारत के लिए क्या मायने?
फिलहाल पाकिस्तान के मोर्चे पर PL-17 के इस्तेमाल की आशंका न के बराबर मानी जा रही है। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सतर्क रहना होगा और संभावित खतरों के लिए पहले से तैयारी बनाए रखनी होगी।
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