तहसील प्रशासन का कहना है कि गाटा संख्या 84, 85 व 86 पर स्थित सरकारी आठ बीघा तालाब को पाटकर अवैध तरीके से मकान बना दिए गए थे। इसी आधार पर नोटिस जारी कर 15 दिन में अवैध निर्माण हटाने को कहा गया और बुधवार को 40 मकानों पर लाल निशान लगाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करने का संकेत दिया गया।
वहीं नियोक्ताओं व मकान मालिकों ने पुलिस और तहसील की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सरायतरीन निवासी पूर्वी वार्ष्णेय ने दावा किया कि जिस जमीन पर मकान बने हैं, वह उनकी आठ बीघा पुश्तैनी जमीन थी, जिसे उनकी दादी राम सुनीति देवी ने बेच दिया था। उनका कहना है कि तहसील में इस जमीन का पूरा राजस्व रिकॉर्ड मौजूद है और 2009 में एडीएम कोर्ट के आदेश के आधार पर यह जमीन निजी मिल्कियत के रूप में दर्ज है।
याद दिलाया जा रहा है कि एडीएम हरज्ञान सिंह पुंडीर की कोर्ट ने 14 सितंबर 2009 को राम सुनीति देवी की निजी संपत्ति होने के हवाले से पीपी एक्ट के तहत जारी 35 नोटिस वापस करने के आदेश दिए थे। आदेश में जिला शासकीय अधिवक्ता की विधिक राय के हवाले से कहा गया था कि उक्त मिल्कियत सरकार अथवा पालिका या स्थानीय निकाय की मतरूक नहीं है और इसलिए निजी संपत्ति पर पीपी एक्ट लागू नहीं होते।
हातिम सराय के लोगों ने आरोप लगाया है कि नोटिस जारी करने व लाल निशान लगाने से पहले प्रशासन ने तहसील रिकॉर्ड व बैनामे दस्तावेजों की जाँच नहीं की। कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने जमीन खरीद कर बैनामा कराया हुआ है और कार्रवाई के समय टीम ने दस्तावेज़ नहीं देखे। इससे भय बना और कई परिवारों ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया—बैनामे की प्रतियाँ लेकर याचिकाएँ दाखिल की जा चुकी हैं और सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है।
विधिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी आईं। सपा विधायक इकबाल महमूद ने डीएम से मिलकर मांग की कि तलाशी-पड़ताल के बाद ही बुलडोजर चलवाया जाए और अभिलेखों की गहन जाँच करायी जाए; उन्होंने कहा कि तहसील के जारी नोटिसों का कोई ठोस आधार नहीं दिखता। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि निजी जमीन होने का मामला उनके संज्ञान में आया है और दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कर समस्या का समाधान किया जाएगा; किसी के खिलाफ भी गलत कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।
प्रशासन ने फिलहाल कार्रवाई रोकने या आगे बढ़ाने के संदर्भ में अंतिम फैसला अदालत के रूख व तहसील के रिकॉर्ड की पुष्टि के बाद ही करने का संकेत दिया है। मामले की अगली कानूनी कार्रवाइयों और हाईकोर्ट की सुनवाई को लेकर इलाके में बेचैनी बनी हुई है।