द देवरिया न्यूज़ /नई दिल्ली: लाल किले के पास हुई विस्फोटक घटना की जांच तेजी से जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि घटना की हर सम्भव कड़ी से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं का परीक्षण हो रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि ब्लास्ट किसी आतंकी साज़िश का हिस्सा था, तो केंद्र की नीति के तहत उसे ‘एक्ट ऑफ वॉर’ माना जाएगा और उसी स्तर पर जवाब देने का विकल्प सरकार के पास मौजूद रहेगा।
घटना के बारे में अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियाँ सबूत एकत्र कर रही हैं, सीसीटीवी फुटेज और फोरेन्सिक विश्लेषण को प्राथमिकता दी जा रही है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी किसी भी नतीजे पर जल्दीबाजी में पहुँचना ठीक नहीं होगा और जांच पूरी होने के बाद ही परिणाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
‘न्यू नॉर्मल’ — नीति जस की तस
सरकार ने पिछली बार ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो कड़ा रुख अपनाया था, वही ‘न्यू नॉर्मल’ अब जारी है — किसी भी आतंकी हमला को सामान्य सीमा-पर्याय नहीं माना जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के समय से यह नीति स्पष्ट कर दी गई थी कि भारत पर हुए किसी भी बड़े आतंकी हमले को युद्ध के क्रियाकलाप (Act of War) के रूप में देखा जाएगा और उसका निर्णायक जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त के संबोधन में भी इस नयी नीति की पुष्टि की थी और कहा था कि यदि दुश्मन लगातार हमले करने की सोचता है तो हमारी सेना समय और परिस्थितियों के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगी।
रक्षा मंत्री का रुख: ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है, लेकिन यह समाप्त नहीं हुआ है। यदि भविष्य में कोई भी नया सैन्य-सुरक्षा उकसावा या मिसएडवेंचर होता है, तो ऑपरेशन को पुनः सक्रिय किया जा सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा व संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्प खुला रखा जाएगा।
सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त तलाशी व चेकिंग बढ़ा दी गई है। विपक्ष तथा कई नागरिक संगठनों ने भी शीघ्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि किसी प्रकार की भ्रांतियां या अफवाहें फैलने से रोकी जा सकें।
क्या होगा आगे?
सिक्योरिटी एजेंसियों की शुरुआती प्राथमिकता जांच में मिले सबूतों के आधार पर संदिग्धों तक पहुँच और उनकी पहचान करना है। फोरेंसिक रिपोर्ट, विस्फोटक सामग्री की प्रकृति व जुटाए गए डिजिटल सबूत—इन सब पर काम होने के बाद ही यह साफ होगा कि घटना किसी आतंकी संगठन की साज़िश थी या कोई अलग कारण। अधिकारियों ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने का अनुरोध किया है। देश की सुरक्षा निकायों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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