मृतक के भाई अश्विन कन्नन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 28 सितंबर को अरविंद ने अपने चिकलासंद्रा स्थित फ्लैट में आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्हें तुरंत महाराजा अग्रसेन अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस को उनके कमरे से 28 पन्नों का एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार को अपनी परेशानी का कारण बताया।
मौत के बाद खाते में आए 17 लाख रुपये
शिकायत में यह भी कहा गया कि अरविंद की मौत के दो दिन बाद, 30 सितंबर को उनके बैंक खाते में 17.46 लाख रुपये एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। परिवार ने इस लेन-देन को संदिग्ध बताया और आरोप लगाया कि कंपनी ने यह राशि अपनी आंतरिक लापरवाहियों को छिपाने के लिए भेजी। परिवार ने जब इस बारे में ओला इलेक्ट्रिक से जवाब मांगा, तो उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला।
एफआईआर को कर्नाटक हाईकोर्ट में दी चुनौती
ओला इलेक्ट्रिक ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने एफआईआर को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां कंपनी को फिलहाल सुरक्षात्मक आदेश मिला है। कंपनी ने बयान जारी कर कहा, “हम अपने सहयोगी अरविंद की असामयिक मृत्यु से गहराई से दुखी हैं। उनके परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं।”
कंपनी का दावा – उत्पीड़न की कोई शिकायत नहीं मिली थी
ओला इलेक्ट्रिक ने कहा कि अरविंद ने अपने कार्यकाल के दौरान न तो उत्पीड़न की और न ही वेतन संबंधी कोई शिकायत दर्ज कराई थी। कंपनी के अनुसार, अरविंद की भूमिका ऐसी थी जिसमें संस्थापक भावेश अग्रवाल या शीर्ष प्रबंधन से उनका सीधा संपर्क नहीं था। कंपनी ने बताया कि परिवार को तत्काल सहायता के रूप में पूरा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट भुगतान किया गया है।
आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मामला दर्ज
पुलिस ने छह अक्तूबर को सुब्रमण्यपुरा थाने में भावेश अग्रवाल, हेड ऑफ होमोलोगेशन इंजीनियरिंग सुभ्रत कुमार दास और अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 3(5) (साझा उद्देश्य) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आरोपित अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।
कंपनी का बयान – सुरक्षित कार्यस्थल के लिए प्रतिबद्ध
ओला इलेक्ट्रिक ने कहा कि वह जांच में पूर्ण सहयोग कर रही है और सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मामला देशभर में कॉर्पोरेट कार्यसंस्कृति, कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।