Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027: अखिलेश की PDA रणनीति को चुनौती देंगे ओवैसी, मायावती भी सक्रिय — राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत

Published on: November 21, 2025
Uttar Pradesh elections 2027

द देवरिया न्यूज़/लखनऊ: 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक रणनीतियों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जहां पिछड़ा–दलित–अल्पसंख्यक (PDA) गठजोड़ के सहारे भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की तैयारी में हैं, वहीं मायावती और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इस समीकरण को चुनौती देते हुए अपने-अपने जनाधार मजबूत करने में जुटे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनाव में विपक्षी पार्टियों की रणनीति एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक होगी, जिसके कारण वोटों का ध्रुवीकरण नए सिरे से हो सकता है।


मायावती फिर दलित वोट बैंक मजबूत करने में सक्रिय

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती एक बार फिर अपने पारंपरिक दलित वोटरों को वापस जोड़ने पर फोकस कर रही हैं। पिछले चुनावों में बसपा का जनाधार कम होने के बाद अब पार्टी फिर जमीन पर सक्रिय दिख रही है। मायावती ने हालिया बयान में साफ कहा है कि बसपा दलितों की सच्ची प्रतिनिधि है और आने वाला चुनाव इसी आधार पर लड़ा जाएगा। यह कदम सीधे-सीधे अखिलेश यादव की PDA रणनीति को चुनौती देता दिख रहा है, क्योंकि PDA में दलित समुदाय को अहम हिस्सा माना गया है।


ओवैसी का दावा — “इस बार जीतने आए हैं, असर दिखाने नहीं”

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि
“बिहार में महागठबंधन ने हमें कमजोर समझा और नुकसान उठाया। यूपी में भी अगर विपक्ष हमें कमजोर समझेगा तो परिणाम देखना होगा।”

बिहार में एआईएमआईएम ने 5 सीटें जीतीं और करीब दर्जन भर सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। ओवैसी का दावा है कि आगामी यूपी चुनाव में पार्टी दोगुनी ताकत से मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा:
“बिहार में हम 24 सीटों पर खिलाड़ी बने। यूपी में कम से कम 48 सीटों पर असर दिखाएंगे। हम चिढ़ाने के लिए नहीं, जीतने के इरादे से आए हैं।”


अखिलेश पर सीधा हमला: “किस चुनाव में उन्होंने जीत दिलाई?”

ओवैसी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें हर चुनाव में एआईएमआईएम को दोष देने की आदत हो गई है, जबकि सच्चाई यह है कि स्वयं सपा कई चुनाव हार चुकी है।

ओवैसी ने कहा:
“2014 लोकसभा मेरी वजह से मोदी नहीं जीते। 2017, 2019, 2022 और 2024 — कौन सा चुनाव अखिलेश ने जीत लिया? हमें कमजोर समझना उनकी खामख्याली है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सहित विपक्षी पार्टियां एआईएमआईएम को साइडलाइन करके खत्म करना चाहती थीं, लेकिन यह रणनीति उलटी पड़ रही है।


“जो परेशान करेगा, हम भी जवाब देंगे” — ओवैसी का चेतावनी भरा बयान

एक इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा कि विपक्ष यह सोचता है कि हमें गठबंधन से दूर रखकर और रणनीतिक रूप से ब्लॉक कर हमें खत्म कर देगा। उन्होंने कहा:
“वो समझते हैं कि अपने प्यादों को भेजकर हमें मात देंगे। लेकिन सियासी शतरंज हम भी खेलना जानते हैं। जितने प्यादे भेजे हैं, वे अब परेशान होंगे।”

ओवैसी ने साफ किया कि राजनीतिक संघर्ष एकतरफा नहीं होगा:
“अगर वे हमें परेशान करेंगे, तो हम भी उन्हें परेशान करेंगे। यह सिर्फ एक तरफ नहीं चलेगा।”


UP में मुस्लिम और पिछड़ा वोट पर तीन-तरफा मुकाबला

उत्तर प्रदेश में बड़ी आबादी मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग से आती है। अब इस वर्ग पर दावा करने वाली तीन बड़ी ताकतें मैदान में हैं:

नेता / पार्टीमुख्य टारगेट वोटरणनीति
अखिलेश यादव (सपा)OBC + दलित + मुस्लिमPDA मॉडल
मायावती (बसपा)दलित + अति दलितपारंपरिक वोट वापसी
असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM)मुस्लिम + पिछड़ास्वतंत्र चुनाव, सीटें जीतने का लक्ष्य

इस त्रिकोणीय दावे से विपक्षी वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ सकती है, जो बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। खुद ओवैसी ने कहा है कि वह किसी गठबंधन के भरोसे नहीं बल्कि अपनी ताकत पर चुनाव लड़ेंगे।


2027 में क्या होगा बड़ा समीकरण?

ओवैसी का दावा है कि 2027 में उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश राजनीति का बड़ा खिलाड़ी बनेगी और जीत के इरादे से मैदान में आएगी। वहीं सपा चाहती है कि पूरा विपक्ष BJP के विरुद्ध एकजुट रहे। बसपा ने अभी तक तीसरे विकल्प के तौर पर खुद को स्थापित करने की रणनीति अपनाई है।

स्पष्ट है कि 2027 का चुनाव सिर्फ BJP बनाम विपक्ष नहीं रहेगा, बल्कि विपक्ष के भीतर ही नेतृत्व और जनाधार की लड़ाई गहराएगी।


इसे भी पढ़ें : देवरिया में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply